Sat30082014

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समाजवादी सरकार का फासीवाद

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम पत्र

आपके मंत्री आज़म खान साहेब ने इन गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है. मंत्री जी को पूरी सड़क साफ़ चाहिए. जिस रोड से भी वो गुजरते हैं, उस रोड पर दो किलोमीटर तक के दायरे में किसी भी रिक्शे और ठेले को (यहाँ तक कि बाइक और कार को भी) पुलिस खड़ा नहीं होने देती है...

कंवल भारती

माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी, अभिवादन के साथ निवेदन करना है कि कृपया रामपुर जिले में रिक्शावालों और ठेलों पर फल-सब्जी बेचने वाले गरीब लोगों पर पुलिस-जुल्म पर संज्ञान लेने की कृपा करें, जिसकी रिपोर्ट स्थानीय अखबारों में प्रमुखता से छपी है. 

akhilesh-yadav-chiefइन रिक्शावालों और ठेलों पर फल-सब्जी बेचने वाले गरीब लोगों पर पुलिस की यह ज्यादती कोई पहली बार नहीं हो रही है. जब से आपकी सरकार बनी है,   मंत्री आज़म खान साहेब ने इन गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है. मंत्री जी को पूरी सड़क साफ़ चाहिए. जिस रोड से भी वो गुजरते हैं, उस रोड पर दो किलोमीटर तक के दायरे में किसी भी रिक्शे और ठेले को (यहाँ तक कि बाइक और कार को भी) पुलिस खड़ा नहीं होने देती है.

जिस दिन वो रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं, दिन हो रात, स्टेशन पर पुलिस के वाहन के सिवा कोई रिक्शा-आटो वहां खड़ा नहीं हो सकता. उस वक्त और भी बहुत सारे यात्री ट्रेन से उतरते हैं, उन्हें घर पहुचने में कितनी दिक्कत होती होगी. इसका एहसास आज़म खान साहेब को तो नहीं है, पर आपको तो होना चाहिए, क्योंकि आपकी सरकार समाजवादी मानी जाती है, फासीवादी नहीं.

आपके मंत्री जी ने रामपुर का पूरा माहौल फासीवादी बना रखा है. वे रिक्शावालों और ठेलों पर फल-सब्जी बेचने वाले गरीब लोगों के सबसे बड़े दुश्मन हैं. अतिक्रमण के नाम पर उनके खिलाफ पुलिस से कार्यवाही कराते हैं और पुलिस उन गरीबो के ठेले उलट देती है, ठेलों में रखा उनका सारा माल सड़क और नाली में गिर जाता है. मंत्री और पुलिस को नहीं पता कि वे लोग कितनी सुबह मंडी जाकर फल-सब्जी लेकर आते हैं और किस तरह दिनभर सड़क पर खड़े होकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं. आपके मंत्री जी उनसे उनकी रोटी छीनकर इन गरीबों को समाजवाद का कौन सा चेहरा दिखा रहे हैं?

माननीय मुख्यमंत्री जी, यदि आप अपने मंत्री जी की तानाशाही पर लगाम नहीं लगाते हैं, तो दूसरे राजनीतिक दल इन गरीबों के पक्ष में खड़े हो सकते हैं और पुलिस-ज्यादती की इन वारदातों का राजनीतिकरण कर सकते हैं? जिस तरह  मंत्री जी के इशारे पर पुलिस ने रिक्शावालों और ठेलों पर फल-सब्जी बेचने वाले गरीब लोगों पर जुल्म किये, ऐसी हालत में कुछ भी अप्रिय हो सकता था.

शायद मंत्री जी यही चाहते हैं कि कुछ अप्रिय हो, और वे उस पर राजनीति करें. किन्तु, अगर ये रिक्शावाले और ठेलों पर फल-सब्जी बेचने वाले गरीब लोग आपसे यह कहें कि ठीक है, हम नहीं चलायेंगे रिक्शे और नहीं बेचेंगे फल-सब्जी, तो फिर हमे नौकरियां दो, या हमें इतनी पेंशन दो कि दो वक्त की रोटी अपने बच्चों को खिला सकें. तब आपका जवाब क्या होगा?

आप अपने काबिना मंत्री जी को समझाइये कि वो आपकी पार्टी की और ज्यादा छवि खराब न करें, पहले ही वो बहुत ख़राब कर चुके हैं, जिसकी वजह से लोकसभा चुनाव में उनके रिश्तेदार उम्मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई थी. अगर आप इस पत्र का संज्ञान लेंगे, तो रामपुर के गरीबों के हक में और समाजवाद के हित में मैं आपका शुक्रगुजार होऊंगा.