योगी के बगावती तेवर पर भाजपाई चाहे जो जलेबी बनायें, लेकिन साफ है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की करीब दर्जन भर सीटों पर भाजपा का सीधा टक्कर किसी और से नहीं बल्कि भाजपा के बागियों से ही है और लक्ष्य प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को तीसरी बार हार का तमगा थमाना है...
जनज्वार. उत्तर प्रदेश में भाजपा तैयारी से लेकर चुनाव प्रचार तक में दूसरे दलों के मुकाबले पिछड़ी जा रही है। चुनावी बेला में बसपा के दागियों को कमल थमाकर भाजपा नेताओं ने आ बैल मुझे मार का काम किया था और अब पार्टी अंतरविरोध थमे नहीं थम रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से हिंदूवादी नेता और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ पार्टी विरोध का बिगुल बजा रहे हैं तो अनुशासन हिनता के आरोप में भाजपा से निकाले गये रामाशीष राय और आईपी सिंह पार्टी को परिवारवादी और तानाशाह मान भाजपा विरोध में शामिल हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को महामंत्री बनाने से खफा पार्टी के चार सीनियर मंत्रियों के अपने पद से इस्तीफा देने के कारण पहले से ही झूल रही पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह पर अब लदने लगी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र, चुनाव प्रभारी उमा भारती, सीनियर नेता केशरी नाथ त्रिपाठी जैसे दिग्गजों का खुद चुनाव मैदान में होने से इन नेताओं की असल चिंता खुद की सीट बचाने की है। ऐसे में ये नेता अपनी बचाएं या दूसरे के लिए प्रचार करें भाजपा के लिए यह बड़ा सवाल बन गया है।
यानी एक तो नीम दुजे करेला यह है कि भाजपा में रहते हुए बागी बने नेता दूसरे दलों के मुकाबले भाजपाई उम्मीदवारों को हराने में ज्यादा दम-खम से लगे हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही समेत अन्य बड़े नेताओं की उम्मीदवारी से सामंजस्य की कमी दिख रही है। वहीं दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी से निकाले गए दागी मंत्रियों को प्रत्याशी बनाए जाने से खासकर बुंदेलखंड में कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।
भाजपा एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘प्रदेश पार्टी मुख्यालय में कोई बड़ा नेता प्रचार पर नजर रखने के लिए नहीं है, इसलिए प्रचार में सामंजस्य की कमी दिखाई दे रही है। बड़े नेताओं के खुद प्रत्याशी होने से मुश्किल और बढ़ गई है। केंद्रीय नेता सिर्फ राजधानी में प्रेस कांफ्रेंस करने ही आते हैं।’ उधर, विधानसभा चुनाव में उमा भारती को आगे कर उत्तर प्रदेश जीतने की मंशा पाले भाजपा को दागी प्रत्याशियों के कारण खासी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
दागी और दलबदलूओं को टिकट दिए जाने के मुद्दे पर संगठन में भड़की असंतोष की ज्वाला तमाम उपायों के बाद भी शांत नहीं हो पा रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा का भविष्य तय करने वाले भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी के जनाधार वाले नेताओं को खड़ा किया है। इनमें से तगड़ा मुकाबला देवरिया जिले के पथरदेवा सीट से खड़े भाजपा प्रत्याशी और प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही को मिल रहा है।
योगी आदित्यनाथ के कृपापात्र और हिंदू युवा वहिनी के नेता राणा प्रताप सूर्य प्रताप शाही से मुकाबले में है। सूर्य प्रताप शाही पिछले दो बार से कसयां विधानसभा से चुनाव हार चुके हैं और वे परिसिमन के बाद नये क्षेत्र पथरदेवा से अबकी मैदान में है। जबकि यह क्षेत्र योगी आदित्यनाथ का कार्यक्षेत्र है जहां पार्टी के वोटर भाजपा के नाम पर नहीं बल्कि योगी के चाहने वालों को ही अपना मानते हैं। राणा प्रताप निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
इसी तरह गोरखपुर की बांसगांव सीट से भाजपा प्रत्याशी सुभावती पासवान के खिलाफ हिंदू युवा वाहिनी के नेता और निर्दलीय प्रत्याशी राम लक्ष्मण चुनाव मैदान में हैं। रामकोला भाजपा प्रत्याशी दीपलाल भारती के खिलाफ योगी समर्थक शंभू चैधरी टक्कर में हैं तो मेंहदावल से भाजपा के चंद्रशेखर पांडेय के मुकाबले में हिंदू युवा वाहिनी के निर्दलीय प्रत्याशी राकेश सिंह बघेल हैं।
पार्टी में रहते हुए पार्टी का विरोध और खिलाफ में प्रत्याशी खड़ा करने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ कहते हैं, ‘जो जनता की सेवा करेगा वही जनता का प्रत्याशी बनेगा। मैं भाजपा का विरोधी नहीं हूं बल्कि मेरा विरोध उन नेताओं से है जो भ्रष्टाचार और भ्रम के जरिये जनता का नायक बनना चाहते हैं।’
योगी के इस जवाब पर भाजपाई चाहे जो जलेबी बनायें लेकिन साफ है कि पूर्वी उत्तर प्रेदश की करीब दर्जन भर सीटों पर भाजपा का सीधा टक्कर किसी और से नहीं बल्कि भाजपा के बागियों से ही है। और योगी का अंतिम लक्ष्य प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को तीसरी बार हार का तमगा थमाना है.
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