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आज माओवादी आंदोलन अधिक संगठित है : मिर्डल

स्वीडन भारत से बहुत दूर है लेकिन वहां भारत की जनता के पक्ष में एकजुटता आंदोलन की लोकप्रियता बढ़ रही है. लोग भारत के आंदोलन को समझना चाहते है. इस संबंध में  प्रदर्शन और अध्यन समूहों का विस्तार हो रहा है... 

विष्णु शर्मा


mrydal3सुप्रसिद्ध स्वीडिश लेखक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता येन मिर्डल इन दिनों भारत यात्रा पर हैं. उनकी इस भारत यात्रा का मकसद भारत सरकार द्वारा भारत की जनता पर चलाए जा रहे युद्ध के खिलाफ लोगों को जागरुक करना हैं. लम्बे समय से युद्ध विरोधी संगठनों में सक्रिय रहे येन मिर्डल को तीसरी दुनिया की जनता के संघर्षों के प्रति गहरा लगाव है. उन्होंने 80 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है जिनमें रिर्पोट फॉर्म ए चायनीज विलेज (1963), द सिल्क रोड (1980), कन्फैशन  न ऑफ ए डिसलोयल यूरोपियन (1968) और इण्डिया वेट्स (1986) शामिल है. मिर्डल का साहित्य से भी गहरा जुड़ाव है.

येन मिर्डल के बारे में समयांतर मासिक के संपादक पंकज बिष्‍ट का कहना है, ‘लेखक का सरोकार जनता के साथ कैसा होना चाहिए येन मिर्डल इसके उदाहरण है.’ हाल ही में भारत की जनता के संघर्ष पर आधारित उन की नई पुस्तक, ‘रेड स्टार ओवर इण्डिया’ का प्रकाशन हुआ है. पुस्तक भारत के माओवादी आंदोलन पर केंद्रित है जो लेखक के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है. पुस्तक लिखने के लिए उन्होने 82 वर्ष की आयु में भारत के माओवादी क्षेत्रों की यात्रा की और माओवादी नेतृत्व से बातचीत की.

मिर्डल ने 6 फरवरी 2012 को दिल्ली के राजेंद्र भवन में आयोजित परिचर्चा में भाग लिया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, 'हम यहाँ उपस्थित हुए हैं क्योंकि भारत में जनता के खिलाफ युद्ध चल रहा है. आप भारत के लोग इस युद्ध को रोकना चाहते हैं और मैं तथा अन्य भारत के मित्र जो विदेशों में रहते हैं इस युद्ध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता के साथ मिलकर एक भाईचारा आंदोलन का गठन करना चाहते है. ऐसा करना भारतीय मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं है. हम यह नहीं बताना चाहते कि आप लोगों को अपने मामलों को कैसे सुलझाना है. कोई भी विदेशी ऐसा करने का अधिकार नहीं रखता.

यह पूछे जाने पर कि उस वक्त की तुलना में जब उन्होनें 'इण्डिया वेट्स' लिखी थी आज भारत के आंदोलन की क्या स्थिति है? उन्होने कहा आज भारत का माओवादी आंदोलन अधिकmrydal2 संगठित है. आज यह पहले के मुकाबले अधिक व्यापक एवं शक्तिशाली हो चुका है.मीडिया के बारे में उनका कहना था कि पिछली सदी के अंतरराष्ट्रीय राजनीती के अध्यन से पता चलता है कि छोटे सवालों पर मीडिया अक्सर स्वतंत्र और निष्पक्ष होता है लेकिन जब महत्वपूर्ण मामलों जैसे युद्ध, उपनिवेष, अथवा साम्राज्यवाद की बात आती है तो मीडिया सत्ता और सरकार का मुखपत्र बन जाता है. बहुत से इमानदार पत्रकार होते है लेकिन संपादकीय विभाग जो मालिक के हितों के लिए काम करता है वह हमेशा सर्तक रहता है. जब भी स्थिति की मांग होती है सब से पहले इमानदार पत्रकारों को किनारे किया जाता है. प्रसिद्ध लेखक-पत्रकार एडगर स्नो इसके उदाहरण है जिन्हें शीत युद्ध के समय कॉमिक्स का अनुवाद कर आजीविका कमानी पड़ी थी. कोई भी अमरीकी मीडिया घराना उन्हे काम नहीं देता था.

यह पूछे जाने पर कि युरोप की राजनीतिक स्थिति को वह किस प्रकार देखते हैं? येन का कहना था कि यूरोप में फासीवाद मजबूत हो रहा है. इसका कारण है कि लोगों में वर्तमान आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था के प्रति निराश है. यूरोप में वाम ताकतें बिखरी हुई है इस कारण वाम विकल्प की संभावना कमजोर है.

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भारतीय जनता के संघर्ष के प्रति यूरोप के लोगों के उत्साह पर उनका कहना था कि हालांकि स्वीडन भारत से      बहुत दूर है, लेकिन वहां भारत की जनता के पक्ष में एकजुटता आंदोलन की लोकप्रियता बढ़ रही है. लोग भारत के आंदोलन को समझना चाहते है. इस संबंध में  प्रदर्शन और अध्यन समूहों का विस्तार हो रहा है.

आगामी दिनों येन मिर्डल की योजना दिल्ली और भारत के अन्य हिस्सों में भारत की जनता के खिलाफ सरकार के युद्ध के बारे में चर्चाओं में भाग लेने की है. 10 फरवरी 2012 को मिर्डल जेएनयू के एसएसएस सभागार में पहला कॉमरेड नवीन बाबू स्मिर्ति व्याख्यान पढ़ेंगे.

Comments  

 
+1 #3 मॉडरेटर 2012-02-08 16:27
अभिषेक, वर्तनी की गलती बताने के लिए धन्यवाद. आप लोगों के सहयोग से ही जनज्वार की यात्रा जारी है. भविष्य में भी आप का सहयोग मिलने की उम्मीद के साथ.
जनज्वार टीम
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0 #2 Abhishek Srivastava 2012-02-08 15:07
अरे गुरु, इतनी बढि़या साइट पर मात्राओं की गलतियां इरिटेट करती हैं... कम से कम पंकज बिष्‍ट को तो 'बिष्‍ठ' नहीं लिखते... एक बार कॉपी पढ़ लिया करिए पोस्‍ट करने से पहले... और हां, ''उस वक्त की तुलना में जब उन्होनें इण्डिया वेट्स लिखी थी आज भारत के आंदोलन की क्या स्थिति है? ''- ये सवाल वर्मा जी ने पूछा था...
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+1 #1 rajesh 2012-02-08 14:22
yen mirdal ko is bhayichare k liye ham bharatiyo ka dhanyabad.
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