अन्ना टीम और उनके सहयोगियों का मौजूदा ढांचा अरविंद केजरिवाल के पेरोल पर काम करने वालों का ज्यादा है. कोर टीम के सदस्य नवीन जयहिंद हों या स्वाति मालिवाल ये सभी लोग अरविंद दाहिने-बायें बाजू हैं. स्वाति मालिवाल अरविंद केजरिवाल की भतीजी हैं. क्या देश में इन दोनों के मुकाबले कोई तीसरा अनुभवी आंदोलनकर्ता नहीं...
अन्ना टीम से मतभेद के बिंदू क्या रहे जो आप एकाएक उस टीम की मुखालफत में खड़े हो गये ?
मेरा मुख्य ऐतराज अन्ना हजारे के इस्तेमाल को लेकर था और चिंता आज भी है. अन्ना जी का उपयोग एक ब्रांड की तरह हो रहा है. खुद को अन्ना की टीम कहने वाले चार लोग अरविंद केजरिवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण और मनीष सिसौदिया ने जिस तरह अन्ना हजारे को जकड़ रखा है, वह किसी टीम का उदाहरण नहीं बल्कि कब्जे जैसा है. जिस आंदोलन को खड़ा करने में देश भागीदार रहा, आखिर उसका प्रतिनिधित्व कहां है.
अन्ना हजारे को आप कबसे जानते हैं और दूरियां कब बनने लगीं?
अन्ना से मैं पिछले 9 वर्षों से परिचित हूं. इस वर्ष अप्रैल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से पहले महाराष्ट्र में उन्होंने मुझे पहला सत्याग्रही चुना था. विभिन्न चैनलों के लिए मैं अन्ना का तीन साक्षात्कार कर चुका हूं. मैं आज भी आंदोलन में सिर्फ अन्ना को आदर्श मानता हूं. जहां तक दूरियों का सवाल है तो वह 30 अक्टूबर को उनके दिल्ली पहुंचने बाद मुझे पहली बार पता चलीं जब उन्होंने मेरे द्वारा ब्लाॅग पर किये गये खुलासे के बाद ऐतराज जताया था. हालांकि अब तो उन्होंने यह भी कह दिया है कि उनका मुझसे कोई संबंध नहीं.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अन्ना आंदोलन से संघ के जुड़ाव की जो बात मीडिया में कही है, उसमें कितनी सचाई है? क्या अन्ना हजारे ने कभी संघ सदस्यों को संबोधित भी किया है?
अन्ना हजारे हर तरह के संगठनों का समर्थन करते रहे हैं, इसलिए मोहन भागवत की बात सिरे से खारिज नहीं की जा सकती. ऐसा अब हो रहा है जब वह यह कह रहे हैं कि मैं फलां संगठन का समर्थन करता हूं और फलां का नहीं. संभव है उन्होंने कभी संघ सदस्यों को भी संबोधित किया हो, मगर यह सोचकर कि देश के युवा बेहतरी का प्रयास करेंगे.
आपने एक चैनल से बातचीत में कहा कि अन्ना को माओवादी समर्थक घेरे हुए हैं?
माओवादी समर्थक वाली बात को मैंने दुरूस्त कर लिया है और मानता हूं कि प्रशांत भूषण आदि कुछ लोग हैं जो वामपंथी हैं और वे अपने वाद में बार-बार अन्ना आंदोलन को बांधने की कोशिश करते हैं.
क्या अन्ना हजारे को टीम पर पैसे के हेरफेर का भी शक रहा है, जिसकी वजह से अन्ना केजरिवाल से नाराज थे?
अन्ना के नाम पर देश के हजारों लोगों ने करोड़ों का अनुदान दिया और उस पूरे फंड को अरविंद केजरिवाल ने अपने एनजीओ पीसीआरएफ में जमा करवाया. बहाना यह रहा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन का कोई खाता नहीं है. दूसरा जनता से मिले चंदा का हिसाब भी केजरिवाल ने ठीक से नहीं दिया.
पिछले दिनों अन्ना टीम में मराठी बनाम उत्तर भारतीयों के प्रतिनिधित्व का विवाद उठा था, आपका विरोध कहीं उसी का परिणाम तो नहीं?
ऐसा नहीं है. अगर ऐसा होता तो मैं बार-बार यह क्यों कहता कि इस आंदोलन में देश का प्रतिनिधित्व होना चाहिए. फिलहाल अन्ना आंदोलन के अगुवाओं ने अपनी एक स्वयंभू टीम घोषित कर रखी है जो अपने मीडिया के जानने वालों का लाभ लेकर रोज-ब-रोज चैनलों पर जमे रहते हैं और बाकी लोगों को सिर्फ तब याद किया जाता है जब भीड़ का समर्थन जुटाना होता है. यह अप्रैल आंदोलन के बाद भी हुआ और अब यह नंगई से हो रहा है.
वह कैसे?
अन्ना टीम और उनके सहयोगियों का मौजूदा ढांचा अरविंद केजरिवाल के पेरोल पर काम करने वालों का ज्यादा है. कोर टीम के सदस्य नवीन जयहिंद हों या स्वाति मालिवाल ये सभी लोग अरविंद दाहिने-बायें बाजू हैं. स्वाति मालिवाल अरविंद केजरिवाल की भतीजी हैं. क्या देश में इन दोनों के मुकाबले कोई तीसरा अनुभवी आंदोलनकर्ता नहीं है, जिसे कोर में शामिल किया जा सके. वैसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि गुटबाजी और कब्जे की प्रक्रिया में खड़ी गयी टीम किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की तरफ बढ़ेगी. खुद को अन्ना टीम घोषित करने वाले सभी लोग अरले दर्जे के महात्वाकांक्षी और घमंडी हैं. बस एक मौका आने दीजिए और किसी एक को अधिकार संपन्न होने की देरी है, फिर देखिये कि ये सबसे पहले कैसे एक-दूसरे पर हमला करते हैं.


