मंत्रीमंडल के आकार को लेकर बाबुराम भट्टाराई की चिंता इस कारण भी है कि अभी उनकी सरकार में नेपाल के दो मुख्य दल नेपाली कांग्रेस और एमाले शामिल नहीं है और खुद माओवादी पार्टी का वैद्य पक्ष भी सरकार में शामिल होने के लिए अब तक तैयार नहीं हुआ है.
काठमांडू, 16 नवंबर (जनज्वार). नेपाल की वर्तमान बाबुराम भट्टाराई सरकार नेपाल के इतिहास के सबसे बड़े मंत्रिमंडल वाली सरकार बन गई है. वर्तमान सरकार में 50 से अधिक मंत्री सपथ ग्रहण कर चुके हैं और आगामी दिनों में इसके और बड़े हो जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
कल पत्रकारों से चर्चा के दौरान बाबुराम भट्टाराई ने स्वीकार किया कि उनका ‘जम्बो’ मंत्रीमंडल गठबंधन सरकार की मजबूरी है और वे खुद भी इस बात से असंतुस्ट है. एक सवाल के जवाब में श्री भट्टाराई ने कहा कि वे कई मंत्रियों का तो नाम तक नहीं जानते.
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इसका मुख्य कारण अपनी सरकार को टिकाये रखना है. उनका कहना है कि भट्टाराई सरकार पार्टी के अंदर और बाहर से संकट से घिरी हुई है और उनके विरोधी सरकार को अधिक दिनों तक नहीं चलने देना चाहते. नेपाल की राजनीति में बाबुराम की बढती लोकप्रियता से न केवल पार्टी के बाहर के उनके विरोधी बल्कि पार्टी के भीतर के उनके साथी भी चिंतित है. नाम न बताने की शर्त पर सूत्र का कहना था कि स्वंय अध्यक्ष प्रचण्ड बाबुराम को लंबे समय तक नहीं टिके रहने देना चाहते क्योंकि भारत के विपरीत नेपाल मे किसी पार्टी अध्यक्ष की कुछ हैसियत नहीं होती. हालांकि बाबुराम अध्यक्ष को साथ ले कर चलने की पूरी कोशिश कर रहे है.
मंत्री मंडल के आकार को लेकर बाबुराम भट्टाराई की चिंता इस कारण भी है कि अभी उनकी सरकार में नेपाल के दो मुख्य दल नेपाली कांग्रेस और एमाले शामिल नहीं है और खुद माओवादी पार्टी का किरन वैद्य पक्ष भी सरकार में शामिल होने के लिए अब तक तैयार नहीं हुआ है. किरन वैद्य पक्ष बाबुराम भट्टाराई की सरकार को गलत विचारधारा पर टिकी सरकार मानता है और इसने सरकार के अब लिए गए लगभग सभी फैसलों का लगातार विरोध किया है. वैद्य पक्ष के वरिष्ठ नेता राम बहादुर थापा ‘बादल’ बाबुराम की सरकार को भारत की कठपुतली सरकार मानते है और उनका कहना है कि बाबुराम जनयुद्ध की तमान उपलब्धियों को सरकार बनाये रखने के लिए ‘बेच’ दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री बाबुराम भट्टाराई का कहना है कि 30 नवंबर के बाद उनकी सरकार राष्ट्रीय सहमति की सरकार का रूप ग्रहण कर लेगी ऐसे में प्रश्न उठता है कि तब सरकार का क्या आकार होगा?


