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रैगिंग में दोषी छात्रों को पहली बार जेल

रेलवे पुलिस ने पटरी पर पड़े अमित गंगवार के पास से जो सुसाइड नोट बरामद किया था, उसमें अमित ने लिखा था, ‘आप इसे रैगिंग कहते हैं, लेकिन यह अपमान के साथ जीने को मजबूर करना है और यह बंद होना चाहिए...

जनज्वार. पंजाब के जालंधर जिले की एक अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में डाक्टर बीआर अंबेडकर राष्ट्रीय  तकनीकी संस्थान (एनआइटी) के सात पूर्व छात्रों को रैगिंग मामले में दोषी  पाये जाने पर तीन साल की कैद और 2-2 हजार रूपये जुर्माना किया है। देश  में यह पहला मामला है जब रैगिंग में दोषी  छात्रों पर कार्यवाही हुई है। अदालत ने यह सजा 29 अगस्त को सुनाई थी।

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एनआइटी से 2005 में औद्योगिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे प्रथम वर्ष के छात्र अमित गंगवार ने जालंधर जिले के एक स्थान सुरानुसी के पास ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली थी। अमित के पास से बरामद सुसाइट नोट से पता चला था कि उसने आत्महत्या अपने वरिष्ठ  साथियों की रैगिंग से तंग आकर की थी। ऐसा तब हुआ जबकि 2006 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश  के बाद 2009 में ही विश्विद्यालय  अनुदान आयोग ने रैगिंग के खिलाफ कानून बना दिया था।

आरोपी छात्रों की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायधीश  एसके सिंघला ने कुल ग्यारह आरोपितों में से एक लड़की समेत चार को छोड़ दिया, जबकि सात को तीन साल की सजा सुनाई। उत्तर प्रदेश  के बरेली जिले के रहने वाले मृतक छात्र अमित गंगवार के पिता त्रिवेणी सहाय कहते हैं, ‘अभियुक्त छात्रों को बहुत कम सजा हुई है और कड़ी सजा के लिए वह हरियाणा और पंजाब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।’ 

गौरतलब है कि रेलवे पुलिस ने पटरी पर मरे पड़े अमित गंगवार के पास से जो सुसाइड नोट बरामद किया था, उसमें अमित ने लिखा था, ‘आप इसे रैगिंग कहते हैं, लेकिन यह अपमान करके जीने को मजबूर करना है और यह बंद होना चाहिए।’

रैगिंग के खिलाफ काम करने वाले एनजीओ सोसाइटी एगेंस्ट वायलेंस इन एजुकेशन (सेव) से जुड़े अजय कहते हैं, ‘इस पहले और ऐतिहासिक फैसले से उन छात्रों पर अंकुश लगेगा जो रैगिंग के अपराध में शामिल हैं। अगर एक-दो और अदालतों ने ऐसे फैसले दे दिये तो रैगिंग से निपटना और आसान हो जायेगा।’

जिन छात्रों को सजा हुई हैं उनमें से सभी पूर्वोत्तर के रहने वाले हैं। इनमें से चार सिद्धार्थ कुमार, नवल मलानी, अभिजित बिश्वास , प्रसून किशोर वर्मा- असम के, तनुज राय और प्रमोद हिंगमांग-सिक्किम के और अंकित श्रीवास्तव-नागालैंड के हैं।

Comments  

 
0 #1 parveen chandra 2011-12-06 21:57
रैगिंग में संलिप्त छात्रों को तिन वर्ष की सजा सुना कर न्यायधीश ;ने इतिहास तो जरूर रचा है. परन्तु इसे क्या कोई और दुहराने की भी कोशीश भी करेगा क्योकि यह देश की पहली और अंतिम रैगिंग नहीं है . आये दिन ऐसी घटना होती रहती है. इसके जवलंत उदहारण सैनिक विधालय तिलैया में देखने को मिला है . जिसपर जाँच समिति तो बनी, निष्कर्ष देखना बाकि है.
प्रवीण चन्द्रवंशी
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