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बगैर मान्यता के डिग्रियां बांटता यूपी का आर्किटेक्चर कॉलेज

कॉलेज प्रशासन छात्रों की जिंदगी से खेलने से बाज नहीं आ रहा और अपनी मनमानी लगातार कर रहा है। छात्रों का कहना है कि ‘नो एडमिशन कैटगरी' के बावजूद कॉलेज नये छात्रों का दाखिला कर रहा है। 'नो एडमिशन कैटगरी' मिलने के बाद संस्थान के पास दाखिला देने का अधिकार नहीं बचता है...

लखनऊ से आशीष वशिष्ठ

गौतमबुद्व प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) के फैक्लटी ऑफ़ आर्किटेक्चर, लखनऊ (पूर्ववर्ती गर्वमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर) के छात्रों ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों का कहना है कि विवि प्रशासन की लापरवाही के चलते तकरीबन 300 छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है और वे फैक्लटी को काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर, दिल्ली से मान्यता दिलाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि करीब पांच साल पहले काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर (सीओए), दिल्ली की निरीक्षण टीम ने सत्र 2005-06 में कॉलेज के निरीक्षण के दौरान कॉलेज में फैकल्टी की कमी और तमाम अन्य आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों की कमी के अभाव में मानकों के अनुरूप नहीं पाया था। काउंसिल ने ‘आर्किटेक्ट एक्ट, 1972’ की धारा 20 के तहत कार्रवाई करते हुए कॉलेज को ‘नो एडमिशन' की श्रेणी में डाल दिया था। काउंसिल ने इस बाबत लिखित सूचना उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार एवं मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को दे दी थी।

ऐसे में जीबीटीयू में पढ़ने वाले सभी छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है और वे लाखों खर्च कर कहीं के नहीं रह गये हैं। पिछले सितंबर माह में भी छात्रों ने बड़ा आंदोलन किया था। इस दौरान छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और पढ़ाई नहीं की। करीब एक पखवाड़े तक छात्रों के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहने के बाद विवि प्रशासन छात्रों ने फैक्लटी को मान्यता दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने का छात्रों को आश्वासन दिया था। मगर अब दो महीने बीत जाने के बाद भी कॉलेज प्रशासन अपनी गड़बड़ी का कोई हल छात्रों के सामने नहीं पेश कर सका है।

छात्रों के मुताबिक अक्टूबर में हुआ समझौता प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृपाशंकर, कालेज के प्रिसिंपल प्रो. मुकुल सिंह व लखनऊ प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद थे। छात्रों ने अपनी बात सचिव प्राविधिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन संजय प्रसाद तक भी पहुंचाई थी। छात्रों ने बताया कि लिखित आश्वासन के बाद भी विवि प्रशासन उनके साथ धोखा कर रहा है।

दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन छात्रों की जिंदगी से खेलने से बाज नहीं आ रहा और अपनी मनमानी लगातार कर रहा है। छात्रों का कहना है कि ‘नो एडमिशन कैटगरी' के बावजूद कॉलेज नये छात्रों का दाखिला कर रहा है। 'नो एडमिशन कैटगरी' मिलने के बाद संस्थान के पास दाखिला देने का अधिकार नहीं बचता है, लेकिन फैक्लटी ऑफ़ आर्किटेचर, लखनऊ ने काउंसिल के आदेश को एक किनारे रखकर छात्रों का दाखिला हो रहा है। जाहिर है कॉलेज के इस गड़बड़ी में गौतमबुध प्राविधिक विश्वविद्यालय भी बराबर का भागीदार है।

काउंसिल के आपत्तियों और कमियों को सुधारने की बजाए छात्रों का झूठे आश्वासन देकर कालेज प्रशासन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। छात्रों के अनुसार वर्तमान में कॉलेज में 12 फैकल्टी मेम्बर है, जिनमें 9 स्थायी और 3 अतिथि प्रवक्ता हैं। पहले से ही फैक्लटी की कमी से जूझ रहे कॉलेज में वर्ष 2009 में सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 कर दी गई है।

छात्रों से विभिन्न मदों में मोटी फीस वसूलने के बाद भी कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। पढ़ाई के लिए जरूरी कम्प्यूटर, उच्च स्तर की लाइब्रेरी और दूसरे आधुनिक साधनों व सुविधाओं का टोटा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पीडि़त छात्रों ने कहा कि शैक्षिक यात्रा के नाम पर छात्रों से हर साल हजारों रूपये वसूले जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कई सालों से कोई न कोई बहाना बनाकर शैक्षणिक यात्रा टाल दी जाती है।

प्रदेश की राजधानी में स्थित फैकल्टी ऑफ़ आर्किटेक्चर के प्रबंधन की मनमानी का आलम यह है कि काउंसिल की आपत्तियों के बाद भी बैचलर ऑफ़ आर्किटेक्चर के दो बैच के छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करके जा चुके हैं। रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से पास आउट हो चुके छात्र सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। प्राईवेट संस्थानों में भी नौकरी जान-पहचान और कम वेतन के साथ ही मिल पा रही है। मान्यता के अभाव में छात्र प्राईवेट प्रेक्टिस भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में छात्रों ने 8 दिसंबर से शुरू होने वाले सेमेस्टर परीक्षाओं के बहिष्कार करने की चेतावनी दी थी।

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छात्रों के आंदोलन और नाराजगी से घबराए विवि प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। 7 दिसंबर को छात्रों ने काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर से रजिस्ट्रेशन की मांग क्या उठाई कि उसके अगले दिन गुरूवार को कालेज प्रशासन ने छात्रावास के गेट पर ताला लगाकर छात्रों को कैद कर दिया गया,. ताकि वह बाहर निकल कर आंदोलन ना कर सकें। केवल प्रथम वर्ष के छात्रों को परीक्षा देने के लिए बाहर जाने दिया गया और छात्रों ने काली पट्टी बांधकर परीक्षा दी।

कॉलेज के प्रिसिंपल प्रो. मुकुल सिंह ने छात्रों का सकारात्मक जवाब देने की बजाय डांटकर चुप कराने की कोशिश की, जिसके बाद छात्र प्रिंसिपल आफिस के आगे धरने पर बैठ गए। इस पूरे मामले में प्रिंसिपल से बातचीत करने प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।

Comments  

 
+2 #7 S A Chaudhary 2011-12-13 13:08
students ke andolan me hissa lena aur updates ke liye unke blog ko log on kar sakte hain http://studentgca.blogspot.com/
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+1 #6 rohan 2011-12-12 23:41
prof mukul singh fraud hai.........
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+1 #5 praveen 2011-12-12 23:40
yeh principal saheb ki tanashahi hai... colz ko privat property bana rakha hai.... :oops:
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+1 #4 shivanker barnwal 2011-12-12 13:34
Chattar Shakti Zindabad.............chaatro ko rahul gandhi se milna chahiya aur apni baat aage tak puanchai chaiyae
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+2 #3 archana vishwakarma 2011-12-11 22:34
Ye anaya hai...........students ko iske khilaf sangarsh karna chahiye............hum sab students ke saath hain...........
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+2 #2 sanjeev sharma 2011-12-11 22:19
students ke saath yeh sare aam dokha hai.........chaatron ko ek jut hokar apne haq ki ladai ladni chahiye...........chattar ekta jindabad
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+2 #1 shahnvaz alam 2011-12-11 16:34
studesnt movement nahin hone kee vajah se hai. anyatha chatron ke bhavishya ke sath khelane kee himmat dukan khole reacheron aur principals ko nahin hoti........long live student unity
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