कॉलेज के कारगुजारियों में गौतम बुध प्राविधिक विश्वविद्यालय भी बराबर का भागीदार है। एशिया कॉलेज को बगैर मान्यता मिले ही राज्य प्रवेश परीक्षा-2011 (एसईई) की प्रक्रिया में शामिल कर लिया था, जिसके बूते कॉलेज छात्रों को बरगालाने में सफल रहा...
आशीष वशिष्ठ
लखनऊ के कुर्सी रोड स्थित एशिया स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनजमेंट के फर्जीवाडे के चलते 117 छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। बिना मान्यता ही कॉलेज ने इन छात्रों को बीटेक में दाखिला ले लिया। कुर्सी क्षेत्र में यूपीएआईडीसी की जमीन पर बने एशिया स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनजमेंट ने एसआईसीटीई के अनुमोदन एवं जीबीटीयू की सम्बधता मिले बिना ही 117 छात्रों का दाखिला ले लिया था।

जीबीटीयू की परीक्षा 8 दिसंबर को शुरू होने के बाद भी कॉलेज के बीटेक छात्रों की परीक्षा नहीं हुई तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। १० दिसम्बर को छात्रों ने लखनऊ-महमूदाबाद मार्ग जामकर प्रदर्शन किया था । प्रथम वर्ष के छात्र रामवीर सिंह ने बताया कि प्रबंधतंत्र ने झांसा देकर दाखिला ले लिया और अब जबकि तीन प्रश्न पत्रों की परीक्षा हो चुकी है तब भी प्रवेश पत्र देने के बजाय प्रबंध तंत्र हाथ खड़े कर रहा है।
गुस्साए छात्र फीस और प्रमाण पत्रों के मूल अभिलेख वापसी की मांग कर रहे हैं, जिस पर प्रबंध तंत्र तैयार नहीं हुआ लेकिन पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सोमवार को फीस और प्रमाण पत्रों के अभिलेख वापिस करने का लिखित आश्वाशन दिया। इसके बाद छात्रों ने प्रदर्शन बंद किया। प्रदर्शन में शामिल अभिनव, शादाब, अनमोल, प्रशांत, फिरोज, प्रणय, हमदान, गुलजार आदि छात्रों ने कॉलेज पर ठगी का आरोप लगाया है।
कॉलेज के कारगुजारियों में गौतम बुध प्राविधिक विश्वविद्यालय भी बराबर का भागीदार है। एशिया कॉलेज को बगैर मान्यता मिले ही राज्य प्रवेश परीक्षा-2011 (एसईई) की प्रक्रिया में शामिल कर लिया था, जिसके बूते कॉलेज छात्रों को बरगालाने में सफल रहा। अब मामला खुलने के बाद जीबीटीयू एवं एमटीयू पल्ला झाड़ रहे हैं। गौरतलब है कि तकनीकी शिक्षण संस्थानों को हर वर्ष ऑल इण्डिया काउंसिल ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन से तकनीकी पाठयक्रमों की मान्यता का नवीनीकरण कराना होता है। इसके बाद काॅलेज जिस तकनीकी वि’वविद्यालय से संबद्ध होता है वहां बैठक के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाता है और संबद्धता की प्रक्रिया पूरी होती है।
एशिया कॉलेज को जीबीटीयू से वर्ष 2009-10 में संबद्धता मिली थी। सत्र 2010-11 में भी एआईसीटीई से इनके मान्यता का नवीनीकरण हो गया था। इन दोनों ही वर्षों में एसईई के दौरान हुए दाखिलों में कॉलेज की हालत खस्ता थी और काउंसलिंग से आए छात्रों का आंकड़ा दहाई भी पार ने कर सका था। कॉलेज की 2011-12 के लिए मान्यता की प्रक्रिया चल रही थी। बिना प्रक्रिया पूरी किए ही इस कॉलेज को एमटीयू द्वारा आयोजित राज्य प्रवेश परीक्षा का हिस्सा बनाया गया। आवेदन करने वाले छात्रों को जो फार्म के साथ ब्रोशर मिला था उसमें कॉलेज का नाम यूपीटीयू कोड 504 के साथ दर्ज है, जिसमें चार ब्रांचों में कुल 201 सीटों की मान्यता कॉलेज की दर्शायी जा रही है।
कॉलेज ने एसईई ब्रोशर एवं यूपीटीयू कोड को हथियार बनाकर छात्रों को झांसा दिया और जब सीधे दाखिले की इजाजत मिली तो 117 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया। इससे साफ जाहिर है कि एसईई के ब्रोशर में कॉलेजों का नाम शामिल करने से पहले उनकी संबद्धता एवं मान्यता नहीं जांची जाती है, जिसका फायदा उठाकर कॉलेज छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर जाते हैं। जीबीटीयू के कुलपति प्रो0 कृपाशंकर के अनुसार ‘यदि कोई कॉलेज बिना संबद्धता के दाखिला लेता है तो उसमें वि’वविद्यालय की जबावदेही का कहां प्रश्न उठता है’ मामले से पल्ला झाड़ लिया।
वहीं एसईई 2011 के समन्वयक प्रो0 ओंकार सिंह ने भी यह कहकर कि एसईई के ब्रो’ार में कॉलेजों के नाम विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार उपलब्ध करायी जाती है। इसमें हमारे स्तर पर कोई गलती नहीं हुई है। एशिया स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनजमेंट के डीन डा0 मोहित सक्सेना से इस बारे में जानकारी लेने के लिए उसने संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिनउनसे बात नहीं हो सकी। संभव है कि छात्रों के उग्र तेवरों को देखते हुए कॉलेज छात्रों का वर्ष बचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था कर सकता है।