काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर ने निरीक्षण के बाद कॉलेज को मापदण्ड पूरे ने करने पर नो एडमिशन की श्रेणी में डाल दिया था। काउंसिल की कार्रवाई के विरोध में कॉलेज प्रशासन ने अदालत में चुनौती दी थी। पिछले 6 सालों में अदालती कार्रवाई का नतीजा नहीं निकल पाया है...
लखनऊ. गौतम बुद्व प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) से संबद्ध फैक्लटी ऑफ़ आर्किटेक्चर के छात्रों का विरोध बुधवार को भी जारी रहा। काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर में रजिस्ट्रेशन की मांग को लेकर आंदोलनरत छात्रों अब कॉलेज की मान्यता को सवालों के घेरे मे लाना शुरू कर दिया है।

छात्रों की मांग है कि प्रिंसिपल उनके साथ चलकर दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर (सीओए) के समक्ष उनका पक्ष रखें। काफी हीला हवाली के बाद आंदोलनकारी छात्र प्रिंसीपल मुकुल सिंह से मिल पाए। प्रिंसिपल ने छात्रों को स्पष्ट कहा है कि कॉलेज मुकदमा वापिस नहीं लेगा और इसके लिए उन्होंने प्राविधिक विश्वविद्यालय से अनुमति भी ले ली है।
गौरतलब है कि 2005-06 में काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर ने निरीक्षण के बाद कॉलेज को मापदण्ड पूरे ने करने पर नो एडमिशन की श्रेणी में डाल दिया था। काउंसिल की कार्रवाई के विरोध में कॉलेज प्रशासन ने अदालत में चुनौती दी थी। पिछले 6 सालों में अदालती कार्रवाई का नतीजा नहीं निकल पाया है। काउंसिल चाहता है कि कॉलेज पहले मुकदमा वापिस ले तभी कॉलेज को रजिस्ट्रेशन देने के बारे में विचार किया जाएगा।
अंतिम वर्ष के छात्र राहुल ने बताया कि कॉलेज प्रशासन की हठधर्मिता, अदालती कार्रवाई के कारण छात्रों का भविष्य चैपट हो रहा है। छात्र मोहम्मद नदीम के अनुसार कॉलेज प्रिंसिपल और वि’वविद्यालय प्रशासन मिलकर छात्रों के कैरियर से खिलवाड़ कर रहे हैं। अंतिम वर्ष के छात्र शशांक श्रीवास्तव और अंशुमान शुक्ला के अनुसार छात्रों की बात न तो वाइस चांसलर सुन रहे है और ना ही सरकार और शासन में बैठा कोई जिम्मेदार व्यक्ति। कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय के रवैये से परेशान छात्र अपनी बात एचआरडी मंत्रालय और काउंसिल ऑफ़ आर्किटेक्चर तक पहुंचाने के लिए दिल्ली जाएंगे।