इलाहाबाद विवि के अधिकारियों द्वारा इस बात की पुष्टि कर दी गई है कि एक माह के भीतर ही इविवि में छात्र संघ चुनाव करा लिये जाएंगे। गुरूवार शाम जैसे ही ये खबर छात्रों को मिली परिसर स्थित छात्रसंघ भवन के सामने छात्रों का उत्साह देखते बन रहा था...
आशीष वशिष्ट
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की हरी झंडी विश्वविद्यालय प्रशाशन ने दे दी है. अटकलों पर विराम लगाते हुए विवि प्रशासन ने २२ दिसम्बर को इसकी पुष्टि कर दी थी । विगत पांच वर्षों से छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र आंदोलनरत थे। 6 दिसंबर को हुई इविवि विद्वत परिषद पर सहमति बनी थी, लेकिन उसके मनोनीत छात्र परिषद की बात पर सहमति नहीं बनी, जिसके बाद छात्रों का आंदोलन उग्र हो उठा। प्रदेश में सत्ता संभालते ही बसपा प्रमुख मायावती ने छात्र संघ चुनावों पर रोक लगा दी थी.

समझा जाता है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इविवि के कुलपति प्रो0 एके सिंह को दिल्ली बुलाकर निर्देश दिया कि एक माह के भीतर चुनाव की तिथियां घोषित कर दी जायें।
इलाहाबाद विवि के अधिकारियों द्वारा इस बात की पुष्टि कर दी गई है कि एक माह के भीतर ही इविवि में छात्र संघ चुनाव करा लिये जाएंगे। 22 की शाम जैसे ही ये खबर छात्रों को मिली इविवि परिसर स्थित छात्रसंघ भवन के सामने छात्रों का उत्साह देखते बन रहा था। छात्रों ने इस दिन को विजय के रूप में मनाया।
गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों से इविवि में छात्र संघ चुनाव की मांग छात्र कर रहे थे।छात्र संघ की बहाली को लेकर 14 नवम्बर को फूलपुर में राहुल गांधी की रैली में काला झंडा दिखाकर विरोध किया गया था। जिसमें छात्रनेता अभिषेक यादव को कई केन्द्रीय मंत्रियों ने मारा पीटा था। इसके बाद एनएसयूआई का एक दल छात्र संघ बहाली के लिए दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मिला था, जिसमें सांसद राहुल गांधी ने आश्वासन दिया था कि छात्रसंघ बहाल कर दिया जाएगा।
इसके बाद ही राहुल ने इस मुद्दे पर विचार किया और फिर इविवि के कुलपति को दिल्ली बुलाया गया। दिल्ली में केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से वार्ता हुई, वार्ता के बाद ही ये निर्देढ जारी किया गया। छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर कई दफे छात्रों को लाठी खानी पड़ी थी लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर अडिग रहे।
इधर डेढ महीने में छात्र नेताओं को तीन दफे लाठी खानी पड़ी। 5 दिसंबर को एकेडमिक काउंसिल में छात्र परिषद का प्रस्ताव पारित होने से नाराज छात्रों पर पुलिस ने लाठियां बरसायी थी और 10 छात्रों का नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया था।
संयोग था कि 22 दिसंबर को ही छात्रसंघ बहाल हुआ और उसी दिन उन छात्रों को भी जेल से रिहा किया गया। जिन छात्र नेताओं को जेल से २२ दिसम्बर की देर शाम रिहा किया गया, उनमें विवेकानंद पाठक, अभिषेक यादव, दिनेश सिंह यादव, विकास तिवारी, अखिलेश गुप्ता उर्फ गुड्डू, राघवेन्द्र यादव एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी मोहित शर्मा, अमित सिंह, अभिनव तिवारी और अवनीश काजला शामिल हैं।
इविवि में छात्र संघ की बहाली की खबर मिलते ही लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी विवि में छात्रसंघ की बहाली को लेकर 23 दिसम्बर को कुलपति प्रो0 मनोज मिश्र से मुलाकात की। छात्रों ने लविवि में छात्र हितों की अनदेखी का हवाला देते हुए छात्रसंघ बहाल करने की मांग की। कुलपति ने छात्रों की मांग शीतकालीन अवकाश के बाद विचार करने की बात कही है।
छात्रों का नेतृत्व कर रहे मान सिंह ने कहा कि जेएनयू और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाल कर दिया गया है। ऐसे में कोई वजह नहीं बनती कि लविवि में छात्रसंघ बहाल न हो। छात्र संघ न होने से छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा है।