Sat19052012

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कमजोर राजनीतिक दृष्टि का दौर

एक क्षेत्र संसाधनों से पटा है तो दूसरा पूरी तरह संसाधन विहीन है। वर्तमान में प्रस्तावित स्वरूप में अगर उत्तर प्रदेश का विभाजन किया गया तो उसका भविष्य भी झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसा ही होगा...

इप्सा के 54वें अधिवेशन की रिपोर्ट

जनज्वार. इक्कसवीं शताब्दी का भारत राजनीतिक दृष्टि से कमजोर होता जा रहा है। किसी भी राजनीतिक दल के पास मजबूत नेतृत्व नहीं है। छोटे-छोटे निर्णयों के लिए सरकार और राजनीतिक दलों को एक-दूसरे का मुंह ताकना पड़ता है- लखनउ में 54वें इंडियन पालिटिकल साइंस एसोसिएशन के सम्मेलन में बीआर अम्बेडकर मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज सैनी ने अपने ये विचार रखे।

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राष्ट्रीय स्तर के इस तीन दिवसीय सम्मेलन का 28 दिसम्बर को उद्घाटन करते हुए हुए प्रो0 टीआर केम ने कहा कि उच्च शिक्षा मे इस समय ई-एजूकेशन को शामिल करने की बेहद जरूरत है। ई-एजूकेशन के माध्यम से ही हम अपने छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सामग्री उपलब्ध करा सकते हैं। विवि को चाहिये कि वो अपनी पाठय सामग्री ऑन लाइन करें।

इप्सा के सचिव मेरठ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने बराबर बदलते समाज के परिप्रेक्ष्य में राजनीति की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश का चार राज्यों में विभाजन का प्रस्ताव सिर्फ राजनीतिक लाभों के चलते किया गया है। इसके विकास से कोई लेना-देना नहीं है। बुंदेलखण्ड और हरित प्रदेश की कोई तुलना नहीं की जा सकती है।

कार्यक्रम के मुख्य भागीदार प्राफेसर एसकेझा ने कहा कि एक क्षेत्र संसाधनों से पटा है तो दूसरा पूरी तरह संसाधन विहीन है। वर्तमान में प्रस्तावित स्वरूप में अगर उत्तर प्रदेश का विभाजन किया गया तो उसका भविष्य भी झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसा ही होगा। जहां बीते एक दशक में भ्रष्टाचार, घोटालों, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन में तो कई गुना इजाफा हुआ पर भुखमरी, गरीबी, शिक्षा और जीवन का स्तर और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। प्रो0 झा यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीश न के लोकतंत्र विषय के प्रिंसिपल इंवेस्टीगेटर हैं और दो साल से यूजीसी की तरफ से देशभर के मतदाताओं पर शोध कर रहे हैं।

कुमायूं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मधुरेंद्र कुकार ने राय रखी कि उत्तर प्रदेश के विभाजन में राजनीतिक कारणों की बजाए संसाधनों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्योगों का अभाव है। मध्य उत्तर प्रदे’ा में कानपुर का वर्चस्व टूटने लगा है। बुंदेलखण्ड में अकाल सी स्थिति बनी है। बचा सिर्फ हरित प्रदेश । प्रदेश परिस्थितियों में विभाजन घातक साबित हो सकता है। दिल्ली वि’वविद्यालय के डा0 आरके मिश्र की राय में सत्तारूढ़ पार्टी बसपा से गैर हरिजन वोट कटता नजर आ रहा है।

लविवि कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्र ने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक समिति के सचिव व लविवि के लोक प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 मनोज दीक्षित, द एसोसिएट प्रो0 संजय गुप्ता, द जनरल आफ पालिटिकल साइंस के संपादक प्रो0 संजीव कुमार शर्मा, नेशनल ला युनिवर्सिटी कटक के कुलपति प्रो0 फैजान मुस्तफा, राजस्थान विवि के के प्रो0 भवानी सिंह समेत देशभर के विवि से आए एक हजार से अधिक राजनीतिक शास्त्र विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं। स्थानीय संयोजक प्रो0 मनोज दीक्षित ने सभी प्रतिभागियों केा आभार व्यक्त किया।

Comments  

 
0 #1 DR. MANOJ K TRIPATHI 2012-01-19 17:43
:-)
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