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अकेले नहीं हैं असीम

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सांसद संसद में हंगामा करते हैं, खुलेआम नोट लहराते हैं, लोकपाल बिल फाडते हैं, चुटकुलेबाजी करते हैं तब क्या वे संसद का मजाक नहीं उडाते? देश की जनता का अपमान नहीं करते? मैं असीम त्रिवेदी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि वह अकेले नहीं हैं...

अरविन्द गौड़

मैंने असीम त्रिवेदी के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम वाले कार्टून देखें हैं, वे भ्रष्टाचार पर तीखी और सीधी चोट करते हैं। उनमें किसी का मजाक नहीं, बल्कि आम आदमी की भावनाओं की, गुस्से की वास्तविक अभिव्यक्ति है। मेरी निगाह में यह सिर्फ कार्टूनिस्ट पर प्रतिबन्ध लगाना नहीं, बल्कि मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सुनियोजित तरीके से नियन्त्रण की शुरुआत है।

aseemtrivedi

आखिर कोई किस आधार पर किसी वेबसाइट, लेख, नाटक, पैन्टिग या किताब पर प्रतिबन्ध लगा सकता है? सच कहना क्या कोई अपराध है? हमारे नेता या सरकार इतनी कमजोर या डरपोक क्यों हैं? वे असलियत से क्यों डरते हैं? हमारे बोलने की, लिखने की, कहने की आजादी पर रोक क्यो लगाना चाहते हैं? ये केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल नहीं है, ये केवल लोकतान्त्रिक हकों का हनन भर भी नहीं है, बल्कि ये एक चुनौती है, असल मे ये हमारे संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

सवाल ये भी है कि जब सांसद संसद में हंगामा करते हैं, खुलेआम नोट लहराते हैं, लोकपाल बिल फाडते हैं, चुटकुलेबाजी करते हैं तब क्या वे संसद का मजाक नहीं उडाते? देश की जनता का अपमान नहीं करते? मैं असीम त्रिवेदी को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि वह अकेले नहीं हैं। सरकार की इस गैरलोकतांत्रिक कारवाई के खिलाफ, हम सब उनके साथ खड़े हैं।

(जनज्वार डाट कॉम पर लेख छपने के बाद टीम अन्ना के कोर कमिटी सदस्य अरविन्द गौड़ की फेसबुक पर प्रतिक्रिया)


Comments  

 
+1 #1 Justin 2012-01-09 19:01
We are with you Aseem
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