Last Update : 06 11 2017 09:50:40 AM

गुजरात में 'विकास' का छूटा साथ, बीजेपी को सांप्रदायिकता पर ही भरोसा

गुजरात पुलिस नोटबंदी के समय कोई कालाधन भले न जब्त कर पाई हो, पर इन दिनों वह बेकार हो चुके पुराने नोटों को पकड़कर खबरें बनवा रही है...

जनज्वार, अहमदाबाद। दिसंबर में होने जा रहे 14वें गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत को लेकर आश्वस्त हो सके, इसके लिए वह तरह—तरह के राजनीतिक टोने—टोकटे और तीन तिकड़म में जुटी है।

चहुंओर विकास का दावा करने वाले मोदी जी को अपने गृहराज्य में ही विकास पर कांफिडेंस नहीं हो पा रहा है। चुनाव के रणनीतिकारों को लगने लगा है कि अकेले ''विकास' जीत का भार वहन नहीं कर पाएगा, इसके लिए सांप्रदायिकता और धर्म को भी खड़ा करना होगा।

गुजरात के जामनगर की लोकल क्राइम ब्रांच ने 1 करोड़ के पुराने नोट पकड़े हैं। इसमें 3500 एक हजार के नोट और 13 हजार 5 सौ के नोट मिले हैं। इस आरोप में किसी मोहम्मद सिद्दीक कुरैशी को पुलिस ने पकड़ लिया है, जो जामनगर के ही मोहल्ला खोजानाका का रहने वाला है।

पर इस 'खूबसूरत' गिरफ्तारी पर लाख टके का सवाल यह है कि क्या कुरैशी को पागल कुत्ते ने काटा था जो वह रद्दी बन चुकी नोटों की तस्करी कर रहा था और पुलिस ने उसे लपक लिया।

बहरहाल चुनावी मौसम का यह तयशुदा तमाशा 4 नवंबर को हुआ, रद्दी नोटों की तस्करी में एक मुसलमान सिद्दीक कुरैशी धर लिया गया।

4 नवंबर को एक और करिश्माई गिरफ्तारी हुई। वह भी मुसलमान अजमेरी अब्दुल रियाद की, आतंकवाद के मामले में। गिरफ्तारी करिश्माई इसलिए थी कि ऐन चुनाव से पहले गुजरात पुलिस ने उस आतंकी को दबोच लिया है जिसे गुजरात पुलिस 15 साल से कभी इस डाल कभी उस डाल पर खोज रही थी।

खैर, गुजरात चुनाव संयोग हो सकता है धमाके मामले में 15 साल बाद हुई गिरफ्तारी का। पर गंभीर बात यह कि 24 सितंबर 2002 को गांधीनगर के अक्षरधाम में हुए आतंकी हमले में 32 श्रद्धालु मारे गए थे।

हालांकि इसी आरोप में अब्दुल रियाद का भाई अजमेरी अदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में बरी हो चुका है, जबकि निचली अदालत ने अजमेरी अदम को दोषी करार दिया था।

ऐन चुनाव से पहले मुस्लिम संदिग्धों की यह दोनों गिरफ्तारियां भाजपा के हिंदूवादी एजेंडे को पुष्ट करती हैं, जिसकी सामान्य समझदारी है कि मुसलमानों का आतंकवाद से और आतंकवाद का फर्जी—नकली नोटों से गहरा रिश्ता है।

Posted On : 06 11 2017 09:50:40 AM

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