Last Update : 07 04 2018 12:59:37 PM

गुसांई बोले संटी में झंडा टांग हाफ पैंट में पी टी कराने वाला जंच रहा मुझे मुखिया के लिए

उत्तराखण्ड का मुखिया बनने को लालायित ग्याड़ूओं के बीच से आॅफ द रिकाॅर्ड : भाग—3

हल्द्वानी, जनज्वार। सुणों हो या सैपो! हमारा राज्य जैसे भी बना, बनी गया ठैरा। मेन बात ये ठैरी कि मुख्यमंत्री हमेशा ही पैरासूट ही मिला हमें। किस्सी को भी देख लो। चाहे पंडित ज्यूु हों, ठाकुर सैप हों, कवि हों या फिर मूंछें आकास को मरोड़े सैनिक हों, छोटी आंत वाले धोती धारी हों या न्याय के देवता।

सभी पैरासूट मुख्यमंत्री रहे और ठग खाया ठैरा सारा पहाड़। इन सबने अपने-अपने गुसांइयों को भौत बड़े -बड़े टारगेट दिए बल, हजारों-सैकड़ों करोड़ के। जब-जब ये टारगेट पूरा नीं कर पाते तो गुसांई नाजाज होकर दूसरे को इनकी जगह पैरासूट से उतार देने वाले हुए। तभी तो 17 बरस में 10 मुख्यमंत्री बने बल यहां। नीं तो कायदे में 4 ही नीं होते अब तक।

लेकिन पिछले चुनाव में अजीबी था मुखिया चुनने का पैमाना, मुखिया के लिए लालायित ग्याडुओं को गुंसाईं का बुलावा आया बल। सब झोला-झमटी टांगे पहुंच गए गुसांई दरवार में। गुसांई से मिलना इतना आसान कहां हुआ बल। अध्यक्ष ने ही अपने कक्ष में घंटों बैठाकर हंफा दिया। जब ग्याडुओं की उबासी रुकना मुश्किल हो गया और हाथ-पैर में खवाई ने बैचेन कर दिया तो, ऐलान हुआ कि गुंसाई निकल चुके हैं और आधे घंटे में पहुंच कर पहाड़ का मुखिया तय किया जाएगा।

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ग्याडू जन जब पस्त पड़ गए तो अध्यक्ष ने बड़े स्नेह से कहा कि देश को नई दिशा देने में व्यस्त गुसांई अब आप लोगो को भौती कम समय पे पाइंगे। ग्याडू इतने पस्त पड़ चुके थे कि सोचने लगे कि आ जाएं गुसांई। देखी जाएगी बल। गुंसाई के आने का पता तब जान पाए ग्याडू-जन जब अध्यक्ष खड़े होकर जी- सर, जी- सर करने लगा बल फोन पर और सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। जैसे राष्ट्रगान बज रहा हो बल।

इतने में गुसांई की इंट्री हो गयी, तब तक ग्याडुओं में खड़े रहने की हिम्मत भी खर्च हो गई बल। खैर गुसांई आए और अध्यक्ष से बोले समय कम है सभी से माफी चाहता हूं, आप लोग चाय-पानी लें। मुझे जल्दी निकलना होगा। अब पस्त ग्याडू क्या बोलते।

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गुसांई ने कहा पहाड़ की समृद्वि के लिए हम सबको कंधे से कंधा मिलाकर काम करना है। मैं सोच रहा हूं कि वो जो क्या नाम है उसका, जो संटी में झंडा टांग कर आधी पैंट में बच्चों को पी टी करता था। मुखिया के लिए तो मुझे वोई जंचरा है। क्या आप लोग सहमत हैं मेरे ख्याल से। पस्त ग्याडू जी- सर के अलावा क्या बोल पाते बल। सबकी रजामंदी से हमें नया मुखिया ऐसे मिला बल।

हमारा तो जो हुआ सो हुआ। अब मुखिया बनने को लालायित ग्याडू भी रोज पी टी कर रहे बल।

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Posted On : 07 04 2018 11:43:35 AM

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