Last Update : 12 11 2017 08:52:19 AM

वोट के लिए भाजपा दफ्तर में बंट रही थी दारू की पर्चियां, पत्रकार ने पूछा सवाल तो कर दी ये हालत

#Mob_lynching को आज तक सिर्फ टीवी पर देखा था। शिकार पहली बार हुए थे। जैसे ही हमारे साथ छिना-झपटी हुई तो उन्होंने सबसे पहले कैमरा छीना और मुझे अंदर खींचने लगे। जैसे ही मेरे सर चंद्र मौली जी बीचबचाव को आये तो उनको वे भाजपा कार्यालय में ले जा रहे थे। तभी सर ने कहा भागो और SP को फोन करो। मैंने पुलिस को फोन किया, मगर पुलिस 1 घंटे बाद आकर उल्टा हमें ही थाने ले जाती है...

पढ़िए पत्रकार पंकज चंद्रमौली के साथ क्या हुआ हिमाचल में

जी हां, हम और हमारी टीम लगातार पिछले एक महीने से डीपीआर से आज्ञा लेकर चुनावी कवरेज पर थे। सबकुछ अच्छा जा रहा था हिमाचल को बेहद करीब से देखा, जैसा सुना वैसा लगा भी। पर शायद मैं किसी भ्रम में ही था, या शायद कोई बुरा सपना जो परसों रात टूट गया।

हम 7 नवंबर को हिमाचल के पावंटा साहिब में राहुल की रैली कवर करके नाहन के लिए निकले, क्योंकि वहां भी सीएम राजा वीरभद्र की रैली थी। बहुत अच्छा जा रहा था और हम निकलने वाले थे कि स्थानीय लोगों से पता चला यहां रात को शराब बंटती है। एक गज़ब की स्टोरी हमारे सामने थी, और हम सुबह से उस स्टोरी पर काम करना शुरू भी कर चुके थे।

चूंकि हम बाहरी थे तो हमारे चैनल के वहां के रिपोर्टर का साथ हमें चाहिए था, जो कि मिला भी। दिन में वहां हरियाणा के कुछ मंत्री और एमएलए मिले, जिनकी मैंने बाईट भी ली। चुनावी माहौल पर चर्चा भी की। पर हमें वहा कुछ ऐसा नहीं लगा जो सूत्रों से पता लगता।

पर लगता है ये मेरे जीवन की सबसे काली रातों में से एक थी। 7 नवंम्बर को 5 बजे तक प्रचार थमने वाला था, जैसे शाम हुई वाकई सरेआम चुनाव आयोग की धज्जियां उड़ती दिखीं। भाजपा कार्यलय में शराब का वितरण हो रहा था और ग्रामीण लोगो को पर्ची दी जा रहीं थी जो किसी निजी होटल में दिखा शराब ले सकते थे।

मैं और मेरे सर चंद्रमौली शर्मा ने जैसे पूरा माहौल देखा और कुछ हिला देने वाले विजुवल हाथ लगे तो हम भी हिल गये कि शराब की इतनी खेप।

हमारे हाथ इतना मैटिरियल लग चुका था कि हम चैनल पर चला सकें। उसके साथ हमें भाजपा प्रत्याशी नाहन का पक्ष भी जानना था तो हमने स्थानीय पत्रकार को काॅल की, पर उस समय वो बाहर थे तो हमने भाजपा के मीडिया सलाहकार से समय मांगा की एक बाईट चाहिए तो भाजपा प्रत्यासी ने हमारी टीम को ऑफिस में बाईट लेने का समय दिया।

जैसै ही हमने बिंदल जी को बाहर ही पार्टी के ऑफिस के बाईट लेनी चाही और बताया की आपके यहां के कुछ शराब बंटने के सीन भी हाथ लगे हैं, तो भाजपा प्रत्याशी वहां से निकल पड़े और उनके जाने के करीब 2-3 मिनट बाद सभी पार्टी कार्यकर्ता हम पर टूट पड़े।

#Mob_lynching को आज तक सिर्फ टीवी पर देखा था। शिकार पहली बार हुए थे। जैसे ही हमारे साथ छिना-झपटी हुई तो उन्होंने सबसे पहले कैमरा छीना और मुझे अंदर खींचने लगे। जैसे ही मेरे सर चंद्र मौली जी बीचबचाव को आये तो उनको वे भाजपा कार्यालय में ले जा रहे थे। तभी सर ने कहा भागो और SP को फोन करो। मैंने पुलिस को फोन किया, मगर पुलिस 1 घंटे बाद आकर उल्टा हमें ही थाने ले जाती है।

युद्धवीर सिंग थाना प्रभारी गुन्नूघाट (नाहन) थाने ले जाकर कहते हैं, 'तुम साले पत्रकार हो जुत्ती खाने लायक' और भी न जाने क्या-क्या... मेडिकल में जान—बूझकर रात से अगले दिन की शाम करना, ताकि बिना मेडिकल के बात रुक जाये।

सहन बहुत किया, पर कुछ लोकल पत्रकारों की वज़ह से बहुत सहायता हुई। सर का फोन नहीं था, सिर्फ मेरा फोन था। किस-किस प्रकार का दबाव झेला, फोन पर फोन, एफआईआर वापिस लेने का। मैं टूट चुका था, पर सर की हिम्मत से संघी और भाजपा के गुंड़ों से लड़ाई जारी है। जो झेला—सहा, सब लिखना चाहता हूँ पर हिम्मत नही अब।

(घटना के बारे में jk न्यूज़ चैनल के गौरव सागवाल ने लिखा है। रिपोर्ट में दिख रही पत्रकार फोटो पंकज चंद्रमौली की है। उन पर यह हमला हिमाचल प्रदेश चुनाव कवरेज के दौरान हुआ।)

Posted On : 11 11 2017 12:21:17 PM

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