Last Update : 10 11 2017 01:20:00 PM

न ट्रंप, न पश्चिमी मीडिया दिखाना चाहते उत्तरी कोरिया की वास्तविक तस्वीर

उत्तर कोरिया को समझने के लिए जरूरी है इस महत्वपूर्ण लेख को एक बार पढ़ना

ऐबा बार्टलेट जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिक हैं, वह उस 3 सदस्यीय टीम का हिस्सा रहीं हैं जिन्होंने हाल ही में 24 अगस्त 2017 से 31 अगस्त 2017 तक उत्तरी कोरिया की यात्रा की थी। प्रस्तुत लेख ऐबा बार्टलेट के उत्तरी कोरिया में बिताए गये एवं विभिन्न स्थानों और नागरिकों से मिलने तथा वार्तालाप पर आधारित उनके अनुभव का एक अंश है...  अनुवाद : केसर राना

हम लोग अधिकांशतः उत्तरी कोरिया पर लिखे लेखों में मानवीय पक्ष नहीं देखते हैं। 2.5 करोड़ लोगों में उन चन्द चेहरों का ही उल्लेख मिलता है जो कि अमेरिकी हमलों में या तो कत्ल कर दिये गये या फिर अपाहिज बना दिये गये। मैं उस छोटे से दल का हिस्सा थी जिसने डीपीआरके की यात्रा की। इस यात्रा का मकसद था कि कोरियाई लोगों से उनके देश और इतिहास के बारे में सुना जाए।

पियोंगयांग उत्तरी कोरिया (कोरिया का जनवादी गणतंत्र- डीपीआरके) सबसे कम समझ में आने वाला तथा दुनिया के समस्त देशों के द्वारा फैलाए गये झूठ से पीड़ित देश है। पश्चिमी मीडिया द्वारा इस देश के सन्दर्भ में मन-गढ़ंत समाचार फैलाए जाते रहे हैं जो कि चौकाने वाले हैं। मसलन उत्तरी कोरियाई तुम्हें मार देना चाहते हैं, इसी तरह की झूठी अफवाहें जैसे 'सभी आदमियों को एक ही तरह के बाल कटवाने का आदेश है,’ यह एक ऐसी कहानी जिसे वाशिंगटन ने खुद से परोसी है, या फिर उत्तरी कोरियाई सेना के सन्दर्भ में ही खबरें क्यों न हो।

उत्तरी कोरिया के सैन्य क्षमता और खतरे के लेखे-जोखे को नजरअंदाज करते हुए 28500 अमेरिकी फौज की दक्षिणी कोरिया में उपस्थिति, 38 सैन्य प्रतिष्ठान और हाल में दक्षिण कोरिया में स्थापित किया गया टर्मिनल हाई एल्टिट्यूड डिफेन्स बैटरी (THAAD)-‘जो कि अमरिकी रडार उपकरण है’ का विरोध उत्तरी व दक्षिणी कोरिया की जनता ने व साथ ही चीन ने भी किया है।

सितम्बर 19, 2017 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी कोरिया को सम्पूर्ण विध्वंस करने की कसम खाई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब कोरियाई जनवादी गणतंत्र के खिलाफ इस तरह की चेतावनी जारी की गयी। इससे पहले 1995 में कोलिन पावेल ने उत्तरी कोरिया को लकड़ी के कोयले में तब्दील करने की धमकी दी थी। 2013 में पुनः उत्तरी कोरिया को खत्म करने की धमकी को दोहराया गया।

इस तथ्य का कारपोरेट मीडिया में प्रसारित नहीं हाने की मुख्य वजह यह थी कि अमेरिका ने उत्तरी कोरिया की राजधानी पियोंगयांग और देश के अन्य शहरों को 635000 टन बम, जिसमें 32557 टन नपाम बम थे, से अब तक ध्वस्त कर चुका था। निश्चित रुप से उत्तरी कोरिया को कोयले की भट्टी में तब्दील कर दिया गया।

अमेरिका के सेवानिवृत जनरल कर्टिस ई लिमे, जो कि शुरुआती युद्ध में रणनीतिक वायु कमांड के मुखिया थे, ने कहा कि उन्होंने उत्तरी कोरिया के सभी शहरों को जला दिया है। लीमे के शब्दों में ‘लगभग 3 साल की अवधि के दौरान हमने कोरियाई आबादी की 20 प्रतिशत जनता को सीधे युद्ध में हताहत या भुखमरी और जोखिम के चलते मार गिराया।’

उत्तरी कोरिया पर खबरों से उजागर होता है कि उसके खिलाफ अपराधिक प्रतिबंध 1950 से लागू हैं। इस प्रकार की तबाहियों ने पुनर्निर्माण के प्रयासों को और ज्यादा मुश्किल बना दिया। प्रतिबंध जनता के खिलाफ हैं। जिसने जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया, परन्तु सभी विषम परिस्थितियों के बाबजूद कारिया ने शानदार स्वास्थ्य व्यवस्था को बनाए रखा है।

जैसा कि प्रोफेसर माइकल चैसोउडस्की ने कहा, उत्तरी कोरिया की स्वास्थ्य प्रणाली विकासशील दुनिया का विद्वेष है। और विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशक जनरल मारग्रेट चान के अनुसार उत्तरी कोरिया में ‘डाक्टरों व नर्सों की कोई कमी नहीं है.’ 

एक वर्ष में दो बार उत्तरी कोरिया पर पश्चिमी रिपोटिंग में नकली हमले करना (जिसे अमेरिकी विशिष्ट भाषा में वार गेम्स कहा जाता है) और भी समझ से परे है, जिसमें हजारों-हजार फौज लिप्त हो। जैसा कि शोधकर्ता और लेखक स्टीफन गोबेन्स ने कहा ‘उत्तरी कोरियाई फौज को कभी भी स्पष्ट नहीं होता कि क्या अमेरिका द्वारा निदेशित कबायद एक आक्रमण के लिए रक्षात्मक अभ्यास है या तैयारी है।

वास्तविकता के खिलाफ उद्देश्यपूर्ण और परिचित अपराध
उत्तरी कोरिया के बारे में पश्चिमी मीडिया में एक बेतुका व्यंग्यात्मक ‘समाचार’ सुनाया जाता है। जिसका मतलब है कोरियाई लोगों के खिलाफ अमेरिका के अतीत और वर्तमान के अपराधों से ध्यान हटाना और निर्दोषों के कत्ल के लिए अमेरिकी नेतृत्व के लिए समर्थन हासिल करना।

नेतृत्व को बदनाम करने तथा कोई संदर्भ प्रदान करने के लिए कहानियां तैयार की जाती है। जबकि उत्तरी कोरियाई दृष्टिकोण को पूरी तरह खारिज कर दिया जाता है। यह मानक सीरिया, लीबिया, वेनेजुएला, क्यूबा और जहां भी अमेरिका और उसके सहयोगियों ने नियंत्रण और सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं, यही प्रकिया रही है। 

जैसा कि इतिहासकार ब्रुस कमिंग ने लिखा, ‘उत्तरी कोरिया की पिशाची पार्टी लाईन नस्लवाद और पूर्वी कल्पनाओं से रेखांकित है, काई भी इसे स्वीकार करने को राजी नहीं कि उत्तरी कोरिया के पास वास्तविकता की अमेरिकी परिभाषा को न स्वीकारने के पीछे बाजिव कारण हैं।'

हमें यह विश्वास दिलाया जाता है कि उत्तरी कोरियाई नेतृत्व सनकी, नारकीय है जो अमेरिका का विध्वंस करने पर तुला हुआ है। इस तथ्य को पूरी तरह से नदारत कर दिया गया हे कि उत्तरी कोरियाईयों के पास एक अलग परिप्रेक्ष्य हैः अर्थात अपने देश को अमेरिकी हमले के खिलाफ बचाने का अधिकार, आत्मरक्षा का अधिकार।

ट्रंप के द्वारा खात्मे की धमकी के जवाब में डीपीआरके विदेश मंत्री री योंग हो ने 23 सितम्बर को कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका पहला देश था जिसने परमाणु हथियारों का उत्पादन किया और एकमात्र देश जिसने वास्तव में इसका इस्तेमाल किया और हजारों-हजार निर्दोष नागरिकों का कत्ल किया। यह संयुक्त राज्य अमेरिका ही था जिसने उत्तरी कोरिया के खिलाफ 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध के दौरान परमाणु हथियार के इस्तेमाल की धमकी दी। और पहले युद्ध के पश्चात कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु हथियारों की शुरुआत की। इसी कारण के चलते उत्तरी कोरिया को परमाणु हथियारों को रखना पड़ा और अपनी परमाणु क्षमता को मजबूत और विकसित किया, ताकि संयुक्त राज्य अमेरिका का वर्तमान स्तर पर मुकाबला कर सकें।’

आगंतुक की दृष्टि से उत्तरी कोरिया को समझना
प्रचार और इतिहास के अलावा जो हम बमुश्किल उत्तरी कोरिया के संदर्भ में लेखों में देखते हैं, वह है मानवीय पक्ष। दो करोड़ पचास लाख में से कुछ चेहरों पर अमेरिकी नेतृत्व वाले हमले के द्वारा हत्या या अपंग होने का खतरा बना हुआ है।

अगस्त 24 से 31 2017 तक मैं तीन प्रतिनिधियों में से एक थी जो कि कोरियाई लोगों से उनके देश और इतिहास के बारे में सुनने के लिए स्वतंत्र रूप से डीपीआरके गयी थी।

जैसा कि पाया हमने लोगों से दक्षिण कोरिया के साथ उनकी एकीकरण की इच्छाओं के बारे में सुना। हमने अतीत में उनके लक्ष्यों के प्रति उनके प्रयासों को जाना। उनकी अमन-चैन बने रहने की इच्छा और फिर से विध्वंस होने से इंकार भी जाना। अपने एक हफ्ते की उत्तरी कोरिया की यात्रा के दौरान ली गयीं तस्वीरें और वीडियों लोगों को उत्तरी कोरिया के कुछ प्रभावशाली अवसंरचना और विकास को दिखाने का प्रयास है जो कि कोरपोरेट मीडिया निश्चित रुप से कभी नहीं दिखाएगा।

उत्तरी कोरिया के अदूरदर्शी दृश्यों पर अमेरिकी यात्रा प्रतिबंध का प्रभाव
मेरे द्वारा देश छोड़ने के ठीक एक दिन बाद ही मेरी डीपीआरके यात्रा पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया। कनाडा और अमरिका की दोहरी नरगरिकता के कारण में अभी भी सितम्बर 2017 के बाद कनैडियाई पासपोर्ट पर कभी भी डीपीआरके वापस जा सकती हूं। यद्यपि एक अमेरिकी के लिए प्रतिबंध का अर्थ है कि डीपीआरके की यात्रा सीमित इजाजत के साथ ही।

संयुक्त राज्य अमेरिकी सलाहकार विभाग के अनुसार, ‘जो भी व्यक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका के पासपोर्ट पर उत्तरी कोरिया जाने की इच्छा रखता है उन्हें 22 सीसीएफ असर के तहत एक विशेष पासपोर्ट सत्यापन प्राप्त करना होगा। 51, 64 और ऐसे सत्यापनों को बहुत ही सीमित परिस्थितियों में ही प्रदान किया जाएगा।’

जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका यह दिखाता है कि यात्रा प्रतिबंध अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाया है लेकिन वही सलाहकार यह धमकी भी देते हैं, 

‘इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के दौरान अमेरिकी पासपोर्ट का उपयोग करने पर अपराधिक दंड की हद में आ सकता है। इसके अलावा विभाग इन प्रतिबंधों के उल्लंघन में उपयोग किए गये पासपोर्ट को रदद् कर सकता है।’

इन शब्दों से यह पता चलता है कि प्रतिबंध का इरादा अमेरिकी जनता को मानवीय चेहरे और डीपीआरके के सकारात्मक पहलूओं को देखने से रोकना है। दरअसल अगस्त 2017 के फोब्र्स के निबन्ध में उत्तरी कोरिया पर पश्चिमी बयानबाजी के बीच सत्य को पटल पर रखना आश्चर्यजनक था।

‘25 वर्ष पहले के मुकाबले में आज पियोंगयांग एक सामान्य शहर जैसा दिखाई देता है। तब वहां निजी कारें नहीं हुआ करती थीं और चंद सरकारी ही कारें हुआ करती थीं। मुझे आश्चर्य था कि वे क्यों ट्रेफिक लाईट से परेशान थे। आज वहां यातायात है। हालांकि यह अमेरिका या चीन के मुकाबले में बहुत कम है। लेकिन अब मुख्य मार्ग खाली भूतियापन जैसा नहीं है। अधिक गड्ढों के साथ लम्बी यात्रा पर आने वाले आगन्तुकों को वास्तविक उत्तरी कोरियाई के साथ अधिक सार्थक अनौपचारिक बातचीत का मौका मिलता है। यह कई कारणों में से एक है क्योंकि मेरा मानना है कि उत्तरी कोरिया की यात्रा पर प्रतिबंध लगाना मूर्खतापूर्ण और प्रतिकूल है।’

बच्चों को खेलकूदों, नृत्य और संगीत (कोरियाई व अन्य) विदेशी भाषाओं, विज्ञान, कम्प्यूटर, लेखन व कढ़ाई-कताई और बहुत से अन्य चीजों को सिखाने के लिए पियोंगयांग में मंग्योंग डे बच्चों के भवन में अतिरिक्त पाठ्यक्रम सिखाए जाते हैं। ये बच्चे निश्चित रूप से पियोंगयांग और उसके आसपास के सबसे प्रतिभाशाली बच्चे हो सकते हैं, परन्तु प्रतिभा को निखारने और बढ़ाने का काम विश्व स्तर पर किया जाना चाहिए। बहुत सारे पश्चिमी देशों के विपरीत उत्तरी कोरिया में यह निःशुल्क है।

2013 में पियोंगयांग अंतरराष्ट्रीय फुटबाॅल विद्यालय खोला गया। इस परिसर में एक विशाल स्टेडियम और एक विद्यालय है। जिसमें फुटबाॅल के साथ अन्य विषयों की शिक्षा लगभग 200 छात्रों को दी जाती है। विभिन्न कक्षाएं अपने कौशल अभ्यास के दौरान वार्मअप ड्रिल ऊर्जा वाहक संगीत के साथ करती हैं। एक साल पहले जब मैं दक्षिणी कोरिया में रहती थी तब ताइकांडों अभ्यास के दौरान इसी तरह की ड्रिल देखी थी।

पियोंगयांग मिडिल स्कूल के छात्र अंगेजी बोलते हुए सार्वभौमिक शांति के लिए इच्छा जाहिर कर रहे हैं। एक लड़की लोगों से शांति का निवेदन कर रही है। उत्तरी कोरिया के हथियारों के मुद्दे पर एक किशोर बालक कहता है, ‘हमने इंटरकांटिनेन्टल बैलेस्टिक राॅकेट्स दूसरे देशों पर आक्रमण करने के लिए नहीं बनाया बल्कि अपने देश को बचाने के लिए देश को शक्तिशाली सुरक्षा बनानी चाहिए'।

संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबंध पर मेरे सवालों का जबाब देते हुए एक लड़की ने बताया, ‘प्रतिबंध न्यायपूर्ण नहीें है। हमारे लोगों ने संयुक्त राज्य अमेरिका का कोई नुकसान नहीं किया है।’

एक अन्य लड़के ने अमेरिका के द्वारा नागरिकों पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘विश्व के सभी लोगों ने हम पर क्यों प्रतिबंध लगाया है? आखिर हम ही क्यों? हम क्यों संयुक्त राज्य अमेरिका पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते? यह ठीक नहीं, यह पूरी तरह गलत है।’

प्राथमिक स्कूल के हाॅल में एक पोस्टर टंगा है, जो कि छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए है। कि यदि उनकी विस्फोटक सामग्री पर नजर पड़ती है तो तुरन्त प्रशासक को सूचित करे। हमारे मेजबान किम सोंग नाम ने बताया, ‘हमें अभी भी पुराने बम मिलते रहते हैं। उदाहरण के लिए जब हम नई इमारत को बनाने के लिए नींव खोदते हैं।'

इस लेखक को लगभग 400 बिस्फोटक बमों के बारे में पता चला, जो कि प्राथमिक विद्यालय के मैदान में पाए गये। इसी तरह किसानों को भी अक्सर विस्फोटक पदार्थ मिलते रहते हैं और माना जा रहा है कि पूरी सफाई में 100 वर्षों से भी ज्यादा समय लग जाएगा। पियोंगयांग युद्ध संग्राहलय में हमें पता चला, ‘पियोंगयांग में 4 लाख लोग रहते थे, और उन्होंने उस शहर पर उससे अधिक बम गिराए।’ संग्राहलय गाईड के अनुसार, 428000 बमों को गिराया गया।

पियोंगयांग में खर्चीला विज्ञान व प्रौद्यौगिकी केन्द्र 2015 में निर्मित हुआ। जिसमें जियो थर्मल ऊर्जा और दीवारों के अंदर घास को जीवित रखने के लिए ड्रिप सिंचाई का प्रबन्ध है। 3000 से अधिक सौर ऊर्जा से चालित कम्प्यूटर हैं। 12 विदेशी भाषओं की किताबें पुस्तकालय में मौजूद हैं। दूरस्थ पाठ्यक्रम के जरिए देश के विभिन्न स्थानों में अध्ययन कराकर डिग्री प्रदान की जाती हैं।

यहां के जू को व्यवस्थित रखा गया है। सबसे अद्भुत इंसानों की आपसी बातचीत है जो कि स्कूली बच्चों से वयस्कों तक के बीच में आदान-प्रदान की जाती है। इस जू से कोरियाई मुस्कुराते हुए वापस निकलते हैं।

पियोंगयांग का जच्चा-बच्चा अस्पताल 300 बिस्तरों का सुविधाओं से लैस अस्पताल है। यद्यपि उत्तरी कोरिया पर अमेरिकी प्रतिबंध ने रंगीन सीटी स्कैन जैसे उपकरण को आयातित होने से रोेक दिया है। डॉ किम युंग सांग कहती हैं कि हमें अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गर्व है।

साथ ही एक मां के रूप में गुस्से के साथ कहती हैं, ‘यह अमानवीय और मानव अधिकारों के खिलाफ है। प्रतिबंध के दौरान भी बच्चों को दवाइयों की आवश्यकता होती है।’ बच्चों का अस्पताल मरीज बच्चों के लिए कक्षाएं उपलब्ध कराता है, ताकि वे अस्पताल में रहते हुए पढ़ाई कर सके।

60 वर्षीय डॉ सो-युंग बच्चों के अस्पताल में टेली कन्सलटेशन विभाग में कार्यरत हैं। ‘हम राजकीय स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर अस्पतालों के साथ सम्पर्क में रहते हैं, ताकि बच्चों की बीमारियों के बारे में जान सके। जब उन्हें बीमारियों के बारे में पता लगाने में परेशानियां होती हैं तब वे इस इस अस्पताल के साथ परामर्श करते हैं।’

उन्होंने ऐसा बताया, ‘मैं अमेरिका और दूसरे देशों के द्वारा लगाए गये प्रतिबंध के चलते अपने गुस्से को दबा नहीं सकता। फिर भी आमतौर पर इसका बहुत अधिक असर नहीं है। हमारे पास एक मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था है। हम अपने लोगो को बेहतर इलाज दे रहे हैं और स्वयं दवाईयां बना रहे हैं।’

पियोंगयांग के दक्षिण में सौ किमी दूर पेकयंग झरने की ओर घूमते हुए मेरी मुलाकात आग पर गोस्त भूनते हुए आदमियों और औरतों के समूह से हुयी। झरने पर अन्य घूमने वाले भुना हुआ गोश्त मछली, उबले अंडे कोरियाई सूशी और किमची खा रहे थे और बीयर व सोजू (मदिरा) पी रहे थे। दक्षिण कोरिया में रहते हुए इस तरह के दृश्य को असंख्य बार समुद्र के किनारे या पहाड़ों पर मैंने देखा था।

उत्तरी कोरिया ने सूखा और भुखमरी का एक कठिन दौर झेला है। लम्बी अवधि तक निर्दयी अमेरिकी प्रतिबंध और देश का विध्बंस किसी भी चीज को दुरुस्त नहीं करता है। लेकिन इसके वाबजूद पियोंगयांग से दक्षिण की ओर 100 किलोमीटर की यात्रा के दौरान न खत्म होने वाले मक्के और धान के हरे लहलहाते खेतों से गुजरे।

मकानों के बीच भूमि पर जंगचोन सहकारी सब्जी फार्म है। सभी घर सौर वाटर हीटर से लैस हैं। और ईधन के लिए मीथेन गैस मौजूद है। सोंगमोंग-ओह अपने पति के साथ कगनाम काउंटी से हटकर फार्म में आ बसी हैं। उनके घर के बाहर एगप्लांट, काली मिर्च, मक्का और जड़ीबूटीयां उगी हुयी थीं। उत्तरी कोरिया पर अमेरिकी धमकी के सन्दर्भ में वह कहती हैं, ‘हालांकि हम युद्ध नहीं चाहते लेकिन हम अमेरिकियों से डरते नहीं हैं।’

एक रात शहर के अन्दर स्थित केसोन युवा मनोरंजन पार्क में मैंने लोगों से मुलाकात की और घोड़े की सवारी भी की। पार्क पूरी तरह से परिवारों और बच्चों से भरा पड़ा था। जिसमें एक 14 वर्षीय बच्चों का समूह कई बार यहां पर आ चुका था। नेम्पो शहर की स्कूल टीचर ने बताया कि वह समय समय पर अपने छात्रों को यहां लाती रहती है।

एक युवा जो ठीक मेरे बगल में घुड़सवारी कर रहा था,ने अपने मोबाइल से फिल्म बनाई। 200 उत्तरी कोरियाई मुद्रा प्रवेश शुल्क (लगभग 0.22 अमेरिका डॉलर) था। प्रवेश के लिए कतार लम्बी थी।

जापानी औपनिवेशिक शासनकाल के दौरान पियोंगयांग शिल्क फैक्ट्री के श्रमिक अस्वास्थकर स्थिति में काम करते थे। जब कारिया आजाद हुआ तो धीरे—धीरे आधुनिकीकरण हुआ तथा स्थितियां बेहतर हुयीं। वर्तमान में फैक्ट्री साफ सुथरी तथा रोशनीदार है। हर जगह पर कूलर हैं।

1600 श्रमिक 8 घंटे की पाली में काम करते हैं। और जो अपने समय को बढ़ाता है, उसे आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जाता है। बच्चों की देखभाल के लिए एक नर्सरी और कुंवारी महिलाओं के लिए विश्रामगृह है। जिसमें कैफैटेरिया, खेल सामग्री व आराम करने के लिए जगह मौजूद है।

पियोंगयांग मे फलों की छोटी दुकान,इस आकार की दुकानों पर नाश्ता, मिठाई, पानी, सोडा, बीयर व आईसक्रीम भी बिकते हैं। यंगाक्डो होटल में सबसे ऊपर घूमने वाला बार व रेस्तरां, आधुनिक नवनिर्मित शहर को दर्शाता है। डीपीआरके में विश्व भर से पर्यटक आते हैं-खासतौर से चीन और जापान से। इतना ही नहीं बल्कि दक्षिण कोरिया से भी। पर्यटन के लिए लगातार क्षेत्र में विस्तार हो रहा है। 11 सितम्बर 2017 से अमेरिकी यात्रा प्रतिबंध के चलते अमेरिकी पर्यटन की और अधिक सम्भावनाओं पर गतिरोध उत्पन्न हुआ है।

पनमुंजम में, निषिद्ध क्षेत्र के पास उत्तरी कोरियाई इतिहास जानने का मौका मिलता है। जिसमें अमेरिका द्वारा 8400 से अधिक युद्ध विराम का उल्लंघन शामिल है। ऐसे कई उल्लेखनीय उल्लंघन में से एक जासूसी पोत का था। यूएएस पुएब्लो जो अब पियोंगयांग के युद्ध संग्रहालय के बाहर प्रदर्शन के लिए रखा हुआ है। उत्तर कोरिया ने कई मौकों पर शांति संधि वार्ता वा प्रस्ताव रखा पर यूएस की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं हुयी।

यह तात्कालिक अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर हैं, जिन्होंने डीपीआरके का दौरा तीन बार किया। बताया जाता है कि 1994 में किम सुंग से वे संकट के दौर में मिले। जब वह अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी के सख्त पर्यवेक्षण के तहत रखने और एक स्थाई शांति संधि पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ आपसी समझौता करने लिए सहमत हुए। ताकि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ शिखर वार्ता के लिए सहमति व्यक्त की जा सके।

निषिद्ध क्षेत्र के पास एक हाॅल में लगी तस्वीरें। 2000 व 2007 के बीच हुयी उन बैठकों की हैं जिसमें उत्तरी कोरिया व दक्षिणी कोरिया के एकीकरण पर विमर्श किया गया। साथ ही दक्षिण व उत्तरी कोरिया में इसके समर्थन के दृश्य हैं। पनमुंजम में हमारे गाईड ने बताया, ‘‘राष्ट्रपति किम सुंग जुलाई 7, 1994 में मृत्यु से एक दिन पूर्व एकीकरण के दस्तावेजों को देख रहे थे। उन्होंने इसके लिए अपना सारा जीवन अर्पित किया।

पियांगयांग का मैट्रो, 3 मिनट की एस्केलेटर की भूमिगत् सवारी है, जिसमें विस्तृत झूमर और दीवार पर खूबसूरत पेंटिग के साथ संगमरमर स्टेशन की श्रृंखला है। यात्री विभिन्न प्रकार के कपड़े पहने हुए, महिलाएं शानदार ड्रेस और ऊंची ऐड़ी के जूतों में तथा दूसरे अनऔपचारिक ब्लाउज व स्लैक्स पहने हुए हैं।

मोजाइक और नक्काशी में खेती, निर्माण, कारखानों, भवन के दृश्य दर्शाए गये हैं। मैट्रों की यात्रा का व्यय चन्द सेंट के बराबर है। यात्रा समूह ऊरी टूर लिखता है कि 5 लाख लोग सब-वे की यात्रा प्रतिदिन करते हैं।

हमारी मेजबानों में से एक किम योंग डीपीआरके का झंडा पकड़े हुए है। उनके पीछे का जूचे टावर का नाम आत्मनिर्भरता के प्रभावशाली दर्शन के नाम पर इसका नाम रख गया है। हमारे एक अन्य मेजबान किम सोंग-नाम ने बताया, ‘जूचे दर्शन की रचना राष्ट्रपति किम सुंग ने की थी। मनुष्य अपने भाग्य का निर्णय खुद करता है, हम अपने साधनों पर निर्भर करते हैं।

(अनुवादक केसर राना पेशे से अध्यापक और समाजवादी लोकमंच के संयोजक हैं।) 

Posted On : 10 11 2017 11:45:34 AM

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