Last Update : 27 04 2018 09:08:14 PM

अमेरिकियों से 6 गुना ज्यादा समय व्हाट्सअप और एफबी पर बर्बाद करते हैं भारतीय

मोबाइल—इंटरनेट का इतनी भारी तादाद में इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह है सस्ता होता स्मार्टफोन का मार्केट और इंटरनेट डाटा के पैकों का सस्ती कीमतों पर उपलब्धता। इन दोनों वजह से भारतीय खासकर युवा मोबाइल—इंटरनेट के एडिक्ट हो गए हैं...

मोबाइल और इंटरनेट क्रांति का सबसे ज्यादा असर भारत में ही हुआ है। इंटरनेट की कीमतों में आई भारी कमी और सस्ते होते स्मार्टफोन के चलते यहां इतनी भारी तादाद में सोशल नेटवर्किंग पर युवा, बुजुर्ग, प्रौढ़ वक्त बिताने लगे हैं कि बाकी काम उसके आगे गौण हो गए हैं।

एक आंकड़े के मुताबिक आॅनलाइन मोबाइल पर समय बिताने में भारतीयों का कोई सानी नहीं है। अमेरिका जैसे प्रगतिशील देश से भी 6 गुना ज्यादा वक्त भारतीय मोबाइल पर बिताते हैं, जबकि इस बात से सब वाकिफ हैं कि इंटरनेट का सबसे ज्यादा सदुपयोग अमेरिका जैसे देशों ने ही किया है, बावजूद उसके अमेरिकियों से भी 6 गुना ज्यादा आॅनलाइन वक्त बिताने वाले भारतीयों की यह स्थिति चिंताजनक है।

भारत में मोबाइल—इंटरनेट का इतनी भारी तादाद में इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह है सस्ता होता स्मार्टफोन का मार्केट और इंटरनेट डाटा के पैकों का सस्ती कीमतों पर उपलब्धता। इन दोनों वजह से भारतीय एक तरह से मोबाइल—इंटरनेट के एडिक्ट हो गए हैं।

युवा पीढ़ी तो जैसे मोबाइल के पीछे पागल हो गई है। कहीं भी यात्रा करते हुए, ट्रेन, बस, मेट्रो या फिर कहीं पर बैठने पर आप यह आसानी से देख सकते हैं कि कोई किसी से बात नहीं करता है हर कोई अपने हाथों में मौजूद मोबाइल पर बिजी है।

डाटा एनालिटिक्स कंपनी 'कॉमस्कोर' के मुताबिक भारत में इस्तेमाल होने वाले टॉप 5 मोबाइल ऐप्स व्हाट्सऐप, गूगल प्ले, यू-ट्यूब, जीमेल और गूगल सर्च हैं।

इसी आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2017 में भारतीयों ने अपना लगभग 90 फीसदी ऑनलाइन समय मोबाइल फोन पर बिताया और इसमें भी ताज्जुब की बात यह कि 98 फीसदी समय व्हाट्सऐप पर बीता।

डाटा एनालिटिक्स कंपनी 'कॉमस्कोर' की रिपोर्ट कहती है कि भारतीयों ने डिजिटल दुनिया में बिताये गये समय में से लगभग 90 फीसदी समय मोबाइल को दिया। सर्वे के मुताबिक 2017 में जहां भारतीयों ने जहां अपना 89 फीसदी समय मोबाइल फोन पर बिताया, वहीं इंडोनेशिया के लोगों ने 87 फीसदी मोबाइल पर बिताया।

मेक्सिको में यह अनुपात 80 फीसदी और अर्जेंटीना में 77 फीसदी रहा। सर्वे रिपोर्ट कहती है कि 2017 में डेस्कटॉप पर 11 फीसदी, यानी औसत 1200 मिनट के मुकाबले औसत भारतीय ने लगभग 3000 मिनट यानी 50 घंटे का समय मोबाइल फोन के साथ बिताया।

भारत में युवा वर्ग तो खासतौर पर मोबाइल का लती हो गया है। खाते, पीते, कहीं जाते या फिर कुछ भी करते मोबाइल उसके हाथ से छूटता नहीं है। गौर करने वाली बात यह है कि एडिक्ट की हद तक मोबाइल का प्रयोग करने से जहां उनकी जीवनशैली गड़बड़ाई है, वहीं तमाम तरह की विकृतियां भी समाज में देखने को मिल रही हैं। यही नहीं रास्ते में चलते या फिर गाड़ी चलाते समय मोबाइल यूज करने के कारण होने वाले हादसों से अखबार पटे रहते हैं।

इससे एक और बात साफ हुई है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने में यूजर्स डेस्कटॉप से मोबाइल पर बहुत तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। यानी भारत में इंटरनेट का सदुपयोग से ज्यादा दुरुपयोग हो रहा है। नहीं तो क्या कारण है कि जितना समय इंटरनेट पर बिताया गया मात्र व्हाट्सअप पर लोगों ने 98 फीसदी समय बिताया।

डाटा एनालिटिक्स कंपनी 'कॉमस्कोर' की रिपोर्ट रिपोर्ट कहती है कि ज्यादातर भारतीय स्मार्टफोन का उपयोग करते हुए सबसे ज्यादा समय इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं। इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स पर बिताए गए पूरे समय में से भारतीयों ने करीब 98 फीसदी समय व्हाट्सऐप पर बिताया। और हां बाकी बचा 2 फीसदी समय भी लोगों नले फेसबुक मैसेंजर पर खर्च किया है। वहीं अमेरिकी में औसतन महज 1 फीसदी समय लोग व्‍हाट्सऐप पर बिताते हैं।

इसी सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा भी हुआ है कि अधिकतर भारतीय नौकरी, कैरियर से संबंधित जानकारियां भी मोबाइल फोन पर ही सर्च इंजन में डालते हैं, मगर जब बात हॉस्पिटल ढूंढ़ने या मेडिकल इंश्योरेंस जैसह स्वास्थ्य सेवाओं की आती है तो डेस्कटॉप का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है।

इस रिपोर्ट से एक बात तो साफ है कि भारत में 90 फीसदी से भी ज्यादा लोग अपना ज्यादातर वक्त व्हाट्सऐप पर जाया करते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यह मोबाइल क्रांति भारत के लिए श्राप है या फिर अभिशाप।

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Posted On : 27 04 2018 09:06:08 PM

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