Last Update : 03 12 2017 10:52:15 PM

महाराष्ट्र के 4100 स्कूल बंद करने जा रही भाजपा सरकार

सिर्फ कोंकण के ही 500 स्कूलों पर लटक जाएगा ताला, बंद में शामिल होंगे माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालय

रामदास तांबे

पुणे। उत्तराखण्ड सरकार की तर्ज पर अब महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने भी कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। महाराष्ट्र की भाजपा सरकार राज्यभर में कुल 4093 ऐसे माध्यमिक और प्राथमिक स्कूलों को बंद करने जा रही है, जहां छात्र संख्या 10 या दस से भी कम है।

सरकार ने स्कूलों को बंद करने के पीछे तर्क दिया है कि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 या 10 से भी कम है। इस तरह के स्कूलों में पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक आते भी नहीं है, इसके कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक यह फैसला इसी माह के अंत तक लागू कर दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री विनोद तावडे के मुताबिक पहले फेज में सरकार 1300 स्कूलों को दिसंबर माह में ही बंद कर देगी। यह निर्णय शिक्षा विभाग के सुझाव पर लिया जा रहा है।

पहले फेज में कोंकण के तकरीबन 500 स्कूलों पर सरकार के इस फैसले से ताला लटक जाएगा। सरकार द्वारा जो आंकड़े पेश किए जा रहे हैं उनके मुताबिक कोंकण में 500 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें छात्र संख्या 10 से भी कम है। वहीं पहले फेज में पुणे के 76 स्कूल शामिल हैं, जिन्हें बंद कर दिया जाएगा।

जिन विद्यालयों पर सरकारी आदेश के बाद ताला जड़ दिया जाएगा, वहां पढ़ने वाले छात्रों और पढ़ाने वाले शिक्षकों को इस बाबत नोटिस थमा दिया गया है। सरकार के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उन्हें 3 किलोमीटर तक के परिक्षेत्र के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में समायोजित किया जा सके।

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सरकार के इस निर्णय को तानाशाहीपूर्ण फैसला बताते हुए शिक्षाविदों का कहना है कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सीधे—सीधे उल्लंघन है।

गौरतलब है कि अभी कुछ माह पहले उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार ने भी ऐसा ही फैसला लिया है कि कम छात्र संख्या वाले तीन हजार स्कूलों को बंद किया जाएगा। यहां के शिक्षकों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। यानी कि इनमें पढ़ने वाले बच्चे अपना इंतजाम स्वयं कर लें और स्कूल भवन किसी अन्य विभाग या पंचायत को सौंप दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, शिक्षा के निजीकरण की तरफ भी बढ़ने का फैसला लिया था उत्तराखण्ड सरकार ने। त्रिवेंद्र सरकार ने फैसला लिया था कि जिन स्कूलों में ज्यादा छात्र संख्या है, उन्हें पीपीपी मोड में किसी निजी कंपनी या प्राइवेट स्कूल के माध्यम से चलाया जाएगा।

यानी जहां छात्र संख्या ज्यादा उनका निजीकरण करो और जहां कम छात्र हैं उन्हें बंद कर दो। विधान परिषद में शिक्षक प्रतिनिधि कपिल पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार की खूब आलोचना की। कहा, सरकार स्कूल और छात्रों के गलत आंकड़े पेश कर रही है और तथ्यों को सही तरह से पेश नहीं कर रही है.

वहीं महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री विनोद तावडे के मुताबिक यह फैसला सभी के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य से 10 तक है, उन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को पास के ही स्कूल में स्थानांतरित किया जाएगा। अध्यापकों या छात्रों को इससे कोई नुकसान नहीं होगा। इस बाबत शिक्षा विभाग ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि वे दिसंबर तक कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों की जानकारी भेज दें, जिससे स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया जा सके।

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Posted On : 03 12 2017 10:23:06 PM

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