Last Update : 03 08 2017 12:57:31 PM

लड़की—लड़के को गांव में नंगा घुमाने वाले वीडियो का सच

सोशल मीडिया आने के बाद से बड़ी चुनौती इस समय खबरों को जानने की नहीं है, बल्कि सही तथ्यों और संदर्भों के साथ खबरों को जानने की है...

प्रेमा नेगी

पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो शेयर हो रहा है। वीडियो में एक पूरी तरह से नंगे किए लड़के के कंधे पर पूरी तरह से नंगी की गयी लड़की को बैठाया गया है और लड़के—लड़की के पीछे ग्रामीण लड़कों—नौजवानों की एक वहशी भीड़ लगी हुई है।

भीड़ में सभी उम्र के मर्द शामिल हैं, जो कभी जोड़े को डंडों से खोदते हैं, कभी पीटते हैं तो कभी फब्तियां कसते हुए अपने भगवान का नारा बुलंद करते हैं, जय—जयकार करते हैं। पूरा दृश्य देखकर ऐसा लगता मानो जैसे कोई त्योहार हो, जैसे किसी देवी—देवता की झांकी निकली हो।

नृशंसता को पार करने वाली यह भीड़ ढोल—नगाड़ों के साथ अपने आराध्य और भगवान का जयगान करते हुए इस प्रेमी युगल के साथ जो कर रही है, उसको देखकर ऐसा लगता है इनका भगवान भी इस वहशीपने के साथ है, अन्यथा दीवारों और मंदिरों से निकलकर वह इस अन्याय को रोक नहीं देता, इस वहशी और दरिंदगी की हद पार करती भीड़ को खदेड़ इनको बचा नहीं लेता।

वीडियो को शेयर करते हुए बताया गया कि यह गुजरात की घटना है और हाल ही में घटी है। वीडियो शेयर करते हुए यह भी कहा गया कि दलित लड़का—लड़की के साथ दबंग जातियों के लोग ज्यादती कर रहे हैं, पर मीडिया ध्यान नहीं दे रही है।

पर यह सच नहीं है, बल्कि झूठ के ज्यादा करीब है।

एक तो यह वीडियो गुजरात का नहीं बल्कि राजस्थान का है। दूसरा यह कोई दलित जोड़ा नहीं बल्कि युवक—युवती भील जाति के आदिवासी हैं। तीसरी बात कोई सवर्ण या दबंग जाति के लोग नहीं उत्पीड़न कर रहे, उनकी अपने ही जाति के पट्टीदार—पड़ोसी हैं। चौथी बात मीडिया ने कहीं इग्नोर नहीं किया, खूब छापा। हिंदी, अंग्रेजी, प्रिंट—चैनल—वेबसाइट सबने छापा।

मानवता को शर्मसार कर देने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया में व्यापक स्तर अब शेयर हुआ है तो लोगों को लगा कि इस समय की घटना है, जबकि यह घटना 16 अप्रैल यानी 4 महीने पहले की है।

राजस्थान के जिला बांसवाड़ा के गांव शंभुपुरा में 16 अप्रैल की दोपहर में भील जाति के लोगों ने भील जाति के ही लड़के—लड़की को नंगा कर घुमाया। घटना पुलिस के संज्ञान में 16 की शाम ही आ गयी थी, लेकिन पुलिस ने मामला जातीय और आपसी होने के कारण कार्यवाही नहीं की। दूसरी बात कोई शिकायती भी नहीं मिला। आदिवासी भीलों का पूरा गांव ही इस नृशंसता के साथ था।

अगले दिन वीडियो किसी ने बांसवाड़ा के एसपी को भेजा, फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। 19 अप्रैल को जब तमाम मीडिया में यह खबर छपी तब जाके स्थानीय पुलिस ने 5 नामजद समेत अन्य 12 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया। कलिंजरा थानाध्यक्ष रवींदर सिंह के मुताबिक लड़का काचरू और उसकी चचेरी बहन दोनों ही बालिग थे और वे शादी कर गुजरात में रहने लगे थे।

क्या था मामला
लड़की की मां, पिता और उसको गांव वाले डायन कहकर प्रताड़ित करते थे। गांव वाले लड़की के परिवार से कोई मतलब नहीं रखते थे और ग्रामीणों ने उसे भुतहा परिवार घोषित कर रखा था।

लड़की के मुताबिक गांव का यही एक लड़का, जो कि रिश्ते में चाचा का बेटा था, उसके मां—बाप और उसके प्रति ठीक रवैया रखता था। इसके कारण परिवार में उसका अधिक आना—जाना था। लड़की ने पुलिस को अपने बयान में बताया कि धीरे—धीरे नजदीकी बढ़ गयी और उसे अपने चाचा के लड़के से प्यार हो गया और हम शादी करना चाहते थे।

पंचायत ने दिया था फरमान
लेकिन गांव वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं होता, इसलिए लड़के—लड़की ने गांव से भागकर शादी कर ली और गुजरात चले गए। ग्रामीणों ने गुजरात का पता लगाकर लड़का—लड़की को गांव में लेकर आए। फिर खाप पंचायत जैसी एक जातिय पंचायत की। पंचायत ने रिश्ता नामंजूर किया और इन्हें समाज और संस्कृति का अपराधी माना गया।

पंचायत में मौजूद मां—बाप की एक न चली। वह दुहाई देते रहे और कहते रहे कि दोनों गांव छोड़ देंगे, हम जमीन—जायदाद से बेदखल कर देंगे। पर पंचायत ने तय किया कि पड़ोसी और एक परिवार के होने के नाते रिश्ते में भाई—बहन इस जोड़े को नंगा कर पूरे गांव में घुमाया जाए और डंडे से पीटा जाए।

गौरतलब है कि राजस्थान का बांसवाड़ा जिला पहले भी कई बार नृशंसताओं के कारण चर्चा में रहा है, जहां औरतों पर डायन कहकर अत्याचार होता रहा है।

Posted On : 03 08 2017 10:12:56 AM

समाज