Last Update : 04 10 2017 08:54:59 AM

टॉम आॅल्टर दुखी थे कि भारत जाने लगा है पाकिस्तान की राह

पटना के कालिदास रंगालय में प्रसिद्ध अभिनेता टॉम अल्टर की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

बिहार, पटना। रंगकर्मियों-कलाकारों के साझा मंच 'हिंसा के विरुद्ध संस्कृतिकर्मी' और 'बिहार आर्ट थियेटर' के संयुक्त तत्वाधान में सुप्रसिद्ध अभिनेता टॉम अल्टर की श्रद्धांजलि सभा का 3 अक्टूबर को आयोजन किया गया।

नाटक कलाकार और बॉलीवुड एक्टर टॉम अल्टार की 29 सितंबर को मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मुत्य हो गयी थी। वह चमड़े के कैंसर से पीड़ित थे।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते लोकप्रिय कवि आलोकधन्वा ने कहा, टॉम आॅल्टर जैसी हिंदी—उर्दू ज़बान दुर्लभ है। हम हिंदी इसलिए अच्छी नहीं बोल पाते कि हमारी उर्दू अच्छी नहीं है। टॉम अल्टर खूब पढ़ा करते थे पढ़ना एक युद्ध की तरह है। मौलाना आज़ाद पर आधारित नाटक में उनका अभिनय एक दुर्लभ अनुभव था, जिसमें हम नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद और सरदार पटेल को नए तरीके से समझत पाते हैं।

सुप्रसिद्ध फ़िल्म समीक्षक जय मंगल देव ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि बॉलीवुड में अंग्रेज कलाकार के रूप में पहचाने जाने वाले टॉम ने तीन किताबें भी लिखीं, जिसमें एक स्पोर्ट्स पर आधारित है। उन्होंने अपना अभिनय कैरियर बॉलीवुड से शुरु किया था और लगभग सभी कला फिल्मों में उन्होंने काम किया।

युवा रंगकर्मी जय प्रकाश की बताते हैं कि उनसे मेरी मुलाकात पटना में ही हुई। बहुत दिनों तक मुझे लगता रहा कि भारतीय मूल के अभिनेता थे ही नहीं। उनके जाने से रंगमंच को बड़ी क्षति हुई है। वो कैंसर से पीड़ित थे और ये बात उन्होंने अपने परिवार से भी छिपाई। अंत समय में उन्हें मालूम हो चुका था कि अब ज्यादा समय नहीं तो वे अपने नाटकों के शो लगतार लगवाने लगे। अंत तक वो खुद को अभिनय के समर्पित रहे।

वयोवृद्ध रंगकर्मी अमियनाथ चटर्जी ने टॉम के बारे में निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि टॉम अल्टॉर एक अनुशासन प्रिय अभिनेता थे। एक बार उन्हें एक छात्रावास के समीप नाटक करना था। पर शोर हो रहा था। उन्होंने तब तक नाटक नहीं शुरु किया जबतक शोर शांत नहीं हुआ।

संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने अपने संबोधन में कहा कि टॉम अल्टर कहा करते थे कि अभिनय सिखाया नहीं जाता खुद करके सीखना पड़ता है। एक बार उन्होंने महान अभिनेता दिलीप कुमार से पूछा कि आप इतना बढ़िया अभिनय कैसे कर लेते हैं तो जवाब मिला 'शेरो शायरी' यानी कविता अभिनय के लिए बेहद आवश्यक है।

अनीश अंकुर ने आगे कहा कि वे देश के हालात से बेहद दुखी रहते थे। वे कहा करते गांधी की हत्या देश में सच की हत्या थी। आज नेहरू को भला बुरा कहा जाता है ये ठीक नहीं है। आज भारत पाकिस्तान और ईरान बनने जी राह पर चल पड़ा है। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए बताया वहां एक स्पेनिश भाषा की बढ़ती से दिक्कत हो रही है जबकि हमलोग कितनी भाषाएं संभाल पा रहे हैं।

सुमन कुमार ने श्रोताओं को बताया कि टॉम आॅल्टर ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। अजित कुमार ने कहा कि जब भी इस तरह की श्रद्धांजलि सभा होती है तो उसमें शामिल होना बहुत मायनों में बेहतर होता है। एक साथ उस व्यक्तित्व के बारे में बहुत सारी बातें पता चलती है, जो हम बहुत पढ़कर भी नहीं जान सकते। लेकिन हमारे युवा साथियों इस तरह आयोजन में शामिल न होना चिंता का विषय है।

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए बिहार आर्ट थियेटर के सचिव कुमार अनुपम ने कहा, इस तरह की श्रद्धांजलि सभा एक तरह का वर्कशाप है, जिसमें बहुत सी बातें सीखने को मिलती हैं। आॅल्टर का बॉलीवुड में वो स्थान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे।

कार्यक्रम में संदीप कुमार, विशाल तिवारी, राजन कुमार सिंह, सत्यजीत केसरी, राजू कुमार, आर नरेंद्र, संजय कांत, नंदकिशोर सिंह, सुनील कुमार, मनोज कुमार , रणविजय कुमार, गोविंद कुमार, रंजन कुमार, अरुण सिन्हा आदि मौजूद थे।

मंच संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी रमेश सिंह ने किया।

Posted On : 04 10 2017 08:54:12 AM

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