सौ साल के रामजीत मजदूरी करते हैं। शकुन्तला और रामजीत का रिश्ता अंतरजातिय है, दोनों बिना शादी किए एक ऐसे राज्य में रहते हैं, जिसकी पहचान पूरे देश में खाप पंचायतों को लेकर है। इन्होंने अपने बच्चे का नाम विक्रमजीत रखा है...
रामजीत से मिलने के लिए सोनीपत जाना हुआ तो यह संयोग ही था कि उनके गांव खरखौंदा से ढाई-तीन किलोमीटर पहले पीपली नाम का गाँव पड़ा. इस गांव को देखते ही आमिर खान की फिल्म 'पीपली लाइव' की याद एक बार को जरूर आई थी और खरखौंदा जाते हुए हमें थोड़ा-थोड़ा अहसास था कि रामजीत की कहानी भी कुछ पीपली लाइव जैसी ही होने वाली है।

देश-विदेश की मीडिया के लिए सोनीपत का खरखौंदा गांव पिछले लगभग एक साल से आकर्षण का केन्द्र बना रहा, सिर्फ एक व्यक्ति की वजह से जिनका नाम रामजीत है और उनकी उम्र लगभग सौ साल है। इस उम्र में कोई क्या खाकर नया रिकॉर्ड बनाएगा, लेकिन रामजीत ने कर दिखाया। जिस उम्र में लोग परदादा-परनाना बनते हैं, उस उम्र आकर रामजीत बाप बने।
निष्चित तौर पर यह आयुर्विज्ञान के लिए चौंकाने वाली बात है, लेकिन यह हुआ। वैसे रामजीत की पत्नी उनके आधे उम्र की है। एक खास बात रामजीत की कहानी में यह है कि वे अपनी पत्नी शकुन्तला के साथ लीव इन रिलेशन में रहते हैं। कायदे से रामजीत और शकुन्तला की कहानी यही खत्म हो जानी चाहिए लेकिन इनके संबंध में बताने के लिए इसके बाद भी बहुत कुछ रहता है।
दिहाड़ी मजदूर रामजीत अपने शहर आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) से मजदूरी की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर चक्कर काटते हुए लगभग बीस साल पहले सोनीपत पहुंचे। इस गांव ने रामजीत को बसने को एक ठीकाना दिया। गांव वालों ने मोहब्बत दी और अपनाया। रामजीत कहते हैं, जब वे गांव आए थे, उस वक्त यहां अकेले ही आए थे। सोनीपत आने से पहले उनकी तीन शादियां हो चुकी थी। उन तीनों से उन्हें कोई बच्चा नहीं हुआ और वे तीनों पत्नियां भी अब जीवित नहीं हैं। सोनीपत वे तय करके आए थे कि यहां बाकि बची जिन्दगी अकेले ही मजदूरी के सहारे काट लेंगे।
शकुन्तला से रामजीत की मुलाकात ढाई साल पहले खरखौंदा में ही हुई। जब वह गांव आई थी, तब विक्षिप्त सी अवस्था में थी। बच्चे उसके पिछे भागते थे। शकुन्तला को परेशान करते थे। शकुन्तला रांची की हैं। ट्रेन-बसों में धक्के-खाते हुए और भीख मांगते हुए वे सोनीपत तक पहुंची। यहीं रामजीत से उनकी पहली मुलाकात हुई और रामजीत ने उनकी लाचारी को समझते हुए अपने घर में पनाह दी।
रामजीत के पड़ोस में रहने वाली एक महिला लाजो, जिसने बच्चे के जन्म के समय शकुंतला को अस्पताल में छोड़ा था, बताती हैं- हमारे लिए बच्चे का जन्म किसी चमत्कार से कम नहीं था। ख़ुशी भी हुई कि चलो शकुन्तला और रामजी को बुढ़ापे में ही सही, बुढ़ापे का सहारा तो मिला।
लाजो बताती हैं कि शकुंतला और रामजीत की शादी धार्मिक रीति रिवाज से नहीं हुई। षकुन्तला विक्षिप्त होकर, गांव में यहां से वहां चक्कर काटती रहती थी। किसी ने कुछ खाने को दे दिया तो खाना खा लिया। उसकी ऐसी हालत देखकर रामजीत ने उसे अपने साथ घर में रख लिया। चूंकि रामजीत भी गांव में अकेला ही रहता था। रामजीत का साथ पाकर शकुन्तला पहले से सामान्य हुई। बच्चे का जन्म गांव के ही सरकारी अस्पताल में हुआ।
शकुन्तला और रामजीत का रिश्ता अंतरजातिय है, दोनों बिना शादी किए एक ऐसे राज्य में रहते हैं, जिसकी पहचान पूरे देश में खाप पंचायतों को लेकर है। इन्होंने अपने बच्चे का नाम विक्रमजीत रखा है।
सौ साल के रामजीत आज भी मजदूरी करते हैं। जब वे खेतों पर मजदूरी कर रहे होते हैं, शकुन्तला पास में ही कहीं बच्चे के साथ मौजूद होती है। शकुन्तला की भी रामजीत से यह तीसरी षादी है। शकुन्तला के अनुसार - उनकी पहली षादी बिहार में और दूसरी शादी झारखंड में हुई थी।
रामजीत की कहानी थोड़ी फिल्मी लग सकती है, लेकिन इसे पढ़ने के बाद आप यह जरूर सोच रहें होंगे कि ऐसा भी हो सकता है क्या या फिर कुछ भी हो सकता है।

हिंदी-अंग्रेजी की मासिक पत्रिका 'सोपान' में कार्यरत और देश के तमाम हिस्सों से लगातार रिपोर्टिंग.
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