जनज्वार.दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ जाने को तैयार हुई स्कूल ’िशक्षक सोनी सोरी के साथ वहां के पुलिस अधिकारियों ने जो अमानवीय व्यवहार किया है, उसका खुलासा सोनी सोरी द्वारा जगदलपुर जेल से भेजे गये एक पत्र में हुआ है। इससे पहले डाक्टरी रिपोर्ट में उसे बुरी तरह प्रताडि़त करने की बात सार्वजनिक हो चुकी है...
जगदलपुर जेल में बंद सोनी सोरी ने सर्वोच्च न्यायालय को संबोधित एक पत्र में कहा है कि 8 अक्टूबर की रात को दंतेवाड़ा के एसपी अंकित गर्ग ने उसे नंगा कर बिजली के झटके दिये और प्रताडि़त किया। पीडि़ता ने पिछले दिनों दिल्ली में हुई गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ दंतेवाड़ा जाने से इस आधार पर इनकार कर दिया था कि पुलिस झुठे मामलों में फंसाकर उसकी हत्या करना चाहती है।
दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता को भेजे इस पत्र में उसने सर्वोच्च न्यायालय से सवाल किया है कि ‘मुझ आदिवासी महिला के साथ इस स्थिति के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस जिम्मेदार है या वहां की सरकार। कहीं यह अत्याचार उसके आदिवासी होने की वजह से तो नहीं हो रहा है।’गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने पिछले दिनों सोनी सोरी को दक्षिणी दिल्ली इलाके से माओवादियों के लिए एस्सार कंपनी से उगाही करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सोनी ने छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ जाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद हाईकोर्ट के जानमाल की सुरक्षा के विशेष आश्वासन पर वह जाने को तैयार हुई थी।
जेल से भेज पत्र में सोनी ने कहा है कि, ‘जब मैं अदालत में हर बार बुलाये जाने पर हाजिर होती रही, अपनी संस्था में आती जाती रही, फिर भी पुलिस ने मुझे उसी बीच भगोड़ा कैसे घोषित कर दिया। आखिर उस बीच पुलिस मुझे क्यों नहीं गिरफ्तार किया, जबकि मैं हर बार थाने बुलाये जाने पर उपस्थित होती रही।’
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा किये गये अत्याचारों के खिलाफ जगदलपुर जेल में भूख हड़ताल पर बैठी सोनी सोरी ने सर्वोच्च न्यायालय को भेजे पत्र में दो टूक पूछा है कि ‘मेरे साथ इस ज्यादती के लिए छत्तीसगढ़ सरकार जिम्मेदार है या पुलिस।’



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