शहर कोतवाली पुलिस ने मुर्दा घर जाकर मृत युवक के पंचनामे की कार्यवाही लगभग पूरी कर ली थी, मगर जब चिंटू को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था तो वो अचानक ज़िंदा हो गया और उठकर बैठ गया...................
संजीव कुमार
उत्तर पदेश के मुज़फ्फ़रनगर के जिला चिकित्सालय में डाक्टरों की घोर लापरवाही का एक मामला सामने आया और मुर्दा जाग उठा | डाक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया गया एक युवक 8 घंटे बाद ज़िंदा हो गया |
गौरतलब है कि 20 वर्षीय राधे उर्फ़ चिंटू नाम के एक युवक को 7 नवम्बर यानी कल सुबह लगभग 7 बजे जिला चिकित्सालय के डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था | इतना ही नहीं परीक्षण के बाद मृत घोषित किये गये चिंटू को मुर्दाघर भी पहुंचा दिया गया था |

डाक्टरी पेशे को शर्मसार करने वाला इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि एक जिन्दा युवक को मृत घोषित कर दिया गया | मानवता को कलंकित करने वाली इस घटना से अपना पल्ला छुड़ाने के लिए जिला प्रशासन ने हालांकि डाक्टर प्रदीप जैन को निलंबित किया जा चुका है |
मृत मान लिए गये युवक का मिमो शहर कोतवाली में जिला चिकित्सालय के तरफ से पहुचा कर कोतवाली की जीडी में दर्ज करा दिया गया था जिसके बाद शहर कोतवाली पुलिस ने मुर्दा घर जाकर मृत युवक के पंचनामे की कार्यवाही लगभग पूरी कर ली थी, मगर जब चिंटू को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था तो वो अचानक ज़िंदा हो गया और उठकर बैठ गया |
इस नज़ारे को देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अस्पतालकर्मी डर गए | इस मामले की सुचना जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को दी गई और युवक को इलाज के लिए दोबारा भर्ती किया गया | अब चिंटू की हालत ठीक है और उसे वैंटिलेटर पर रखा गया है | दरअसल, इस युवक को कल कुछ ग्रामीणों ने जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था | पीड़ित युवक राधे उर्फ़ चिंटू आगरा का रहने वाला है |
जब भी इस तरह की घोर लापरवाही के मामले सामने आते हैं तो अधिकारी कैमरे से मुंह छुपाते नजर आते हैंया फिर नो कोमेंट्स कह कर अपनी बात ख़त्म कर देते हैं |लेकिन सवाल उठता है की एक जिन्दा इंसान कई घंटो तक मुर्दों के बीच में पड़ा रहा, इससे ज्यादा घोर लापरवाही क्या होगी ?


