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बलात्कार के खिलाफ लड़ने की सजा में कुर्की का आदेश

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आशा कार्यकत्री को प्रसव कराने के बहाने बुलाकर दबंगों ने उसका बलात्कार किया, फिर उसके गुप्तांगों में चोट पहुंचाकर मार डाला। कुछ लोगों ने घटना के विरोध में चक्का जाम, धरना प्रदर्शन किया तो प्रशासनिक कार्यवाही के नाम पर दबंग के एक निर्दोष नौकर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया ...

डॉ. रमाशंकर शर्मा

कुछ समय पहले जनज्वार पर हिमांशु कुमार का सोनी सोरी नामक शिक्षिका से सम्बन्धित एक पत्र उच्चतम न्यायालय दिल्ली के नाम पढ़ने को मिला। पढ़कर रूह कांप गई कि इस लोकतन्त्र में ऐसी ऐसी घटनाएं (एसपी द्वारा गुप्तागों मे पत्थर डालकर उत्पीड़न करना) घट रही है। हिमांशु की चिट्ठी पढ़कर भारतीय शासनतंत्र की पक्षधरता का पता चला।

मैं भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नाम एक खुला पत्र लिख रहा हूँ जिससे न्यायालय और देश के लोगों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों आदि सभी को यह पता चल जाय कि महान लोकतंत्र और निष्पक्ष न्यायतंत्र की डीगें हांकना भी एक फैशन बन चुका है।

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इस पत्र को लिखने के बाद मेरे घर की कुर्की होती है तो मुझे अफसोस नहीं होगा कि मैंने आपसे गुहार नहीं लगायी। उसके बाद कम से कम लोगों से आंख मिलाकर बात कर पाऊंगा कि तथाकथित लोकतंत्र किस तरह 'ढोंग तंत्र' बन चुका है, जिसे एक दिन भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा है।

महोदय, हमारे साथ भी कुछ ऐसी ही घटनाएं घटी हैं कि न्यायपालिका से विश्वास उठने को है। मैं भी पुलिस, गुण्डा, सामन्ती नेताशाही गठजोड़ का शिकार हुआ हूं।

मैं, मेरी पत्नी और मेरी बेटी कुल तीन लोगों का एक छोटा परिवार है। एक छोटा सा कमरा है जिसमे हम तीनों मुश्किल से रह पाते हैं। गांव के एक व्यक्ति द्वारा धोखे से जहर पिला दिये जाने के कारण हृदय का रोगी हो चुका हूँ। खेती के नाम पर जो कुछ था, दवा कराने के कारण गिरवी है। मेरी “हैन्ड टू माउथ” वाली स्थिति है। मैं हरदम गरीबी के कारण अस्वस्थ भी रहता हूँ ।

मैं “लोकतंत्र रक्षक सेनानी” रहा हूँ । मैं गांव में सामंतों के खिलाफ एक छोटी पहलकदमी “मजदूर किसान एकता मंच” नाम का संगठन चलाता हूं। हमारे विचारों और आदर्शों से प्रभावित होकर ग्रामीण साथ देने लगे और हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने में सहायता मिलने लगी।

पहली घटना, गांव की एक लड़की ईना देवी की है जो आशा कार्यकत्री थी। ईना देवी सुन्दर चेहरे-मोहरे की थी । उसे दबंगों ने प्रसव कार्य के बहाने बुलाकर उसका बलात्कार किया, फिर उसके गुप्तांगों में चोट पहुंचाकर मार डाला। हम कुछ लोगों (मैं खुद, ललित पटेल, कविजी, गणेश शर्मा, विश्वनाथ यादव, जेपी जायसवाल) ने इस घटना के विरोध में न्याय के लिए चक्का जाम, धरना प्रदर्शन किया तो प्रशासनिक कार्यवाही के नाम पर दबंग के एक नौकर को गिरफ्तार किया गया जो कि निर्दोष है। जो लोग बलात्कार के दोषी हैं उनसे पुलिस वाले खुलेआम यारी-दोस्ती निभा रहे हैं। उन सभी का भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पार्टियों के शरीफज़ादों एवं कोर्ट-कचहरी के साथ गहरे रिश्ते हैं। गांव के सामंतों के थाना और स्थानीय न्यायालय से गठजोड़ की सजा हम जैसे न्यायपसंद लोग भुगत रहे हैं।

दूसरी घटना विट्टन देवी का है, जिस पर सामन्तों ने झूठी चोरी का आरोप लगाकर उसे पीटते हुए गांव में घुमाया और जातिसूचक गालियों से अपमानित करते रहे। उसके शरीर को प्रेस से दागा गया और उसके साथ उसके छोटे बच्चे की भी पिटाई की गयी। गांव में सामन्तवाद का यह बहुत ही घिनौना कुकृत्य था। विट्टन का पति रमाकान्त गांव से बाहर रिक्शा चलाकर परिवार पालता है। क्या इस समाज में ऐसी अमानवीय घटना बेहतर लोकतंत्र के लिए चुनौती नहीं है?

इस घटना को भी मुद्दा बनाकर हम लोग स्थानीय स्तर पर पर्चा, पोस्टर निकाल कर, जनगोलबन्दी करके उस महिला का मेडिकल चेकअप कराने ले जा रहे थे, तो दबंगों ने हम लोगों को गांव के बाहर बन्दूक के बल पर रोक लिया और अपने साथ मेडिकल चेकअप के नाम पर ले गए। फिर हम सभी लोगों ने धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम का काम अपने हाथ में लिया।

मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा तब जाकर प्रशासन ने जनदबाव में आकर ”प्राथमिकी” दर्ज की। उसके बाद उन दबगों (सामंती लोग) के 9 - 10 लोगों की गिरफतारी हुई जिसमें नौकरीपेशा अध्यापक, तथाकथित राजनेता और पूर्व सरपंच आदि रसूखदार शामिल थे। वे लोग हाथों में लाइसेन्सी असलहे लेकर घूमते हैं। उन लोगों को यह बात नागवार लगी कि गांव का एक अदना सा आदमी (जिसकी कोई आर्थिक हैसियत नहीं है) ने हम लोगों को कैसे जेल में बन्द करा दिया?

जेल जाने से उन सबकी क्षेत्र में पहली बार जगहंसाई हुई। उनके चाल चरित्र पर प्रश्नचिन्ह भी लगा। इससे वे सब बौखलाए हुए थे, लेकिन हम सामाजिक कार्यकर्ताओं का लोकतंत्र और जनता की ताकत दोनो पर काफी विश्वास बना।

प्रतिक्रिया में जेल से छूटते ही गांव के राजू गोड़ नामक एक लड़के जो चिउडे़ की दुकान चलाता है, को पैसे का लालच देकर पीडि़ता विट्टन देवी के हम सभी गवाहों के खिलाफ फर्जी एससी/एसटी का मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें पुलिस गांव में जांच करने आई तो गांव के कम से कम 100 लोगों से अधिक ने बयान दिया कि घटना फर्जी है। हमारे साथी बहुत ही ईमानदार हैं और वे आम जनता को उनका हक दिलाने के लिए ही संघर्ष करते हैं। आम जनता के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर चलते हैं। गांव वालों से यह सच्चाई जानने के बाद भी पुलिस मजदूर किसान एकता मंच के तीन कार्यकताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गयी, क्योंकि पुलिसवाले गांव के सामन्तों के हाथ बिक चुके थे।

राजू गोड़ मामले में जुलाई 2011 मे हम तीन लोगों की अवैध गिरफतारी भी हुई जिसमें हमें पुलिस बिना बताए एक बजे रात को जबरन उठा ले गई । मुझे अपने कपड़े पहनने या दवा लेने तक का समय नहीं दिया। बेटी के विरोध करने पर उससे पुलिस वालों ने कहा कि तुम्हारे पापा को कुछ नहीं होगा, वे कल आ जायेंगे। हम लोगों को बडी कठिनाई से हफ्ते भर बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली। आज भी हम लोग राजू वाले फर्जी मुकदमे में एससी/एसटी की धारा में अभियुक्त हैं। महोदय, क्या यही डॉ. अम्बेडकर का आम जनता वाला संविधान है?

सामंतों का मन इतने से भी नही भरा, हम लोगों के खिलाफ कुछ न होते देख सीवान (बिहार) से चोरी का फर्जी केस उनके रिश्तेदारों द्वारा कराया गया। उनका उददेश्य है कि कैसे भी सामंतों के खिलाफ जनसरोकार रखने वाले लोगों को जेल में ठूसा जाय। सीवान वाले झूठे मुकदमे का वर्णन इस प्रकार है। न्यायालय श्री आर. के वर्मा न्या. दण्ड. प्र. श्रेणी सीवान (बिहार) सी/1921/09,टीआर 1301/12, उमाशंकर सिंह बनाम रमाकांत कमकर, (दफा 82 मजमुअए फौजदारी) थाना प्रभारी, तरकुलवा जिला देवरिया (उत्तर प्रदेश) रमाकांत कमकर पुत्र स्व. रामपृत कमकर गढरामपुर, थाना प्रभारी, तरकुलवा जिला देवरिया (उत्तर प्रदेश) दफा 341,321,379,504, आईपीसी करने का उस पर सुबहा हैं । (हम लोगों के पास इस फर्जी मुकदमे की एक कापी है)

माननीय न्यायधीश महोदय हम लोग कैसे मानें कि आपकी न्यायपालिका हमें न्याय देगी, क्योंकि मैं अब भी राजू गोड़ द्वारा फर्जी एससी/एसटी मुकदमे का अभियुक्त हूं । अब तो सिवान से फर्जी मुकदमे का अभियुक्त हूं, जिसमें यहां तक आरोप है कि हम लोग चोरी करके फरार हैं और हमारे घर की कुर्की तक का आदेश आ गया है।

अब हमारे घर की कुर्की होगी, इससे सारा गांव और मैं हतप्रभ हैं। आप ही बतायें कि हम कैसे अब देश की न्याय व्यवस्था पर विश्वास कर पाएंगें? अब यह लोकतंत्र रक्षक सेनानी अपने विचारों और आदर्शो को लेकर लोगों के बीच कैसे जियेगा?

अब आपकी न्याय व्यवस्था में कौन सी धारा या नियम है जो यह सिद्ध करे कि हम लोगों ने सीवान में जाकर चोरी नहीं की है? चूँकि आप न्यायदाता हैं इसलिए आपसे ही एक तरह से अपेक्षा भी करता हूँ कि हमारे साथ जल्दी न्याय हो और अन्यायियों को सजा मिले। अगर हमारे साथ पुलिसिया कारवाई किसी भी रूप मे हुई या मैं जेल गया तो उसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उपर्युक्त सारी घटनाओं का विवरण मैं थाने से लेकर राष्ट्रपति तक को दे चुका हूं कि कभी तो न्याय मिलेगा।

हम सभी अमन पसन्द व मानवाधिकार कार्यकताओं से यह आग्रह करते हैं कि उपर्युक्त विषय में जांच परख कर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। हम इस सहयोग के लिए आपके सदैव आभारी रहेंगे।

(डॉ. रमाशंकर शर्मा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 'मजदूर किसान एकता मंच' संगठन के संयोजक हैं. उन्होंने यह खुला पत्र इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नाम लिखा है.)

 

Comments  

 
0 #13 मनीराम शर्मा 2012-02-26 08:29
सुप्रीम कोर्ट द्वारा दाण्डिक अपील संख्या ९१९/१९९९ मुंशी सिंह गौतम बनाम मध्यप्रदेश राज्य के निर्णय दिनांक १६.११.२००४ में कहा गया है कि न्यायालयों को, विशेष रूप से हिरासत में अपराधों के सम्बन्ध में, अपने रुख, प्रवृति और विचारधारा में परिवर्तन लाने और अधिक संवेदनशीलता दिखाने तथा संकीर्ण तकनीकि सोच के स्थान पर वास्तविक विचारधारा अपनानी चाहिए, हिरासती हिंसा के मामलों की प्रक्रिया में यथा संभव अपनी शक्तियों के भीतर, सत्य का पता लगाया जाय व दोषी बच नहीं जाए ताकि अपराध से पीड़ित को संतोष हो सके कि आखिर कानून की श्रेष्ठता जीवित है|
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0 #12 हिमाँशु कुमार 2012-02-25 21:51
रमा शंकर जी से कल बात् हुई ! जिन साथियों को इस अन्याय को उठाने के कारण पुलिस और दबंगों ने झूठा फंसाया है ! सभी को जमानत मिल गई है और कुर्की टल गई है ! जनज्वार का धन्यवाद !
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0 #11 reyaj m. aanshari 2012-02-25 19:32
ye waqt ki aawaj hai milkar chalen.
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0 #10 NItish 2012-02-12 21:29
hm kab tk isi system me in saeri problems ka solution dhundte rahenge??????????????ye sari sarkare only pase walo ki h ye hm sbko smj ata h to is system ko q ni badal dete h?????????/
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+1 #9 मनीराम शर्मा 2012-02-11 21:11
आप अपने उक्त पत्र की एक प्रति पटना उच्च न्यायलय को भी भेजें तथा वहाँ के क्रमशः गृह एवं न्याय मंतार्लयों को भी भेजें| सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधिपति को भेजना भी लाभकारी रहेगा | इश्वर आपके साथ है |
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0 #8 मनीराम शर्मा 2012-02-11 21:07
ऐसी ही घटना लगभग बीस वर्ष पूर्व राजस्थान में साथिन भंवरी देवी के साथ घटित हुई थी अंतर इतना ही था कि उसे जिंदगी भर प्रताड़ित होने के लिए जिन्दा छोड़ दिया गया था किन्तु बलात्कारी दण्डित नहींहुए | यह स्वतंत्र भारत का असली चेहरा है | पीडितों को एशियाई मानवाधिकार आयोग एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायलय के सामने भी मामला उठाना चाहिए| भारतीय न्यायालयों की दशा तो हम देख रहे हैं|
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0 #7 बाबूराम शर्मा 2012-02-10 23:19
डा0 रमाशंकर शर्मा का मा0 उच्चन्यायालय(इल ाहाबाद)को लिखा पत्र देळरिया जनपद सहित पूर्वांचल में सामंत-पुलिस गठजोड का एक नमूना मात्र है प्रतिक्रियाबादी ,साम्प्रदायिक शक्तियों का संगठित विरौध की उर्वर रणस्थली देवरिया,गौरखपुर सहित पूर्वांचल मे बनने के लिए क्रूरतम दमन उत्पीडन जारीहै। बाबूराम शर्मा (संयोजक) भगत सिंह विचार मंच
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+1 #6 citrakumari 2012-02-10 12:29
ramesh ji ap khud deoria se hai comment dekh annyay ke khilaf utsah bada ap 9792567310 per call kare to apne jile me milkar ek movment khada kiya ja sakata hai kyoki hum naujwano ka is samay yahikartbya hai

apka
MAJDOOR KISAN EKTA MANCH
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+2 #5 citrakumari 2012-02-10 12:20
dear himanshu ji ap agar ramashankar se jaldi mil lenge to unko help hoga unse milane ka samprksutr hai 9792567310 is number se unse bat ho jayegi MAJDUR KISAN EKTA MANCH APKE her aticles ko padata hai apko log bula rahe hai
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+2 #4 हिमाँशु कुमार 2012-02-10 09:22
हमें इस अन्याय को जोर से उठाना होगा ! हम मिल सकते हैं क्या ?
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