Last Update : 31 10 2017 05:12:16 PM

आधार के लिए छात्र को इतना पीटा कि अभिभावक पहुंच गए थाने

मामले की कवरेज करने स्कूल पहुंचे पत्रकार के साथ पुलिस ने की बदतमीजी, कैमरा और आईकार्ड छीनकर धमकाया कि करेंगे तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई

पुणे से रामदास तांबे की रिपोर्ट

आजकल आधार कार्ड हर क्षेत्र में सबसे पुख्ता पहचान पत्र के तौर पर जाना जा रहा है, मगर कभी—कभी आधार कार्ड न होने पर ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो शर्मसार कर देती हैं कि हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। कहीं आधार कार्ड नहीं होने पर गरीबों को राशन नहीं दिया जा रहा जिससे वे मौत के मुंह में समा रहे हैं, तो अब एक बच्चे को इसलिए बुरी तरह कक्षा अध्यापक ने मारा कि उसने आधार कार्ड की जानकारी मुहैया नहीं करायी।

पुणे के एक स्कूल के छात्र श्रीशांत बेल्ले द्वारा आधार कार्ड नंबर स्कूल में मुहैया नहीं कराने पर उसके कक्षा अध्यापक किशोर खरात द्वारा बुरी तरह पिटाई किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना पुणे के चिंचवड स्थित एमएसएस स्कूल का है। पांचवीं कक्षा में पढने वाले मल्लिकार्जुन बेल्ले के बेटे श्रीशांत बेल्ले की क्लास टीचर किशोर खरात द्वारा बुरी तरह पिटाई करने पर छात्र के मां—बाप ने शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। 

अपने पैर और हाथ के घाव दिखाता श्रीसांत बेल्ले

मारपीट की जानकारी श्रीशांत पेल्ले के परिजनों को तब हुई, जब दो—तीन दिन तक उसका घुटने में बुरी तरह दर्द होता रहा। ज्यादा तकलीफ होने पर उसने शिक्षक द्वारा पैर में छड़ी से बुरी तरह से पिटाई करने की बात अपनी माँ संगीता बेल्ले को बतायी।

श्रीशांत के पैर में मार के निशान देखकर उसकी मां दंग रह गई। बच्चे को तुरंत हॉस्पिटल में ले जाकर इलाज के हेतु भर्ती करवाया और शिक्षक से इस हरकत के बारे में पूछने गए तो शिक्षक किशोर खरात ने कहा कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। उसके बाद शिक्षक के खिलाफ चिंचवड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया।

इस मामले में शिक्षक किशोर खरात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 324 बाल न्याय/बाल संरक्षण क 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अब तक शिक्षक को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

जब इस घटना की कवरेज करके यह संवाददाता स्कूल से लौट रहा था तो स्कूल के बाहर चिंचवड़ पुलिस थाना क्षेत्र की महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर उत्कर्षा देशमुख और उनके साथी कर्मचारियों ने उनके साथ बदतमीजी की। संवाददाता का कैमरा छीना गया और कार्रवाई करने की धमकी दी गई।

पुलिस रिपोर्टर का आईकार्ड लेकर चली गई और कैमरा स्कूल व्यवस्थापक को सौंप दिया गया। कैमरे से घटनास्थल की कवरेज की वीडियो को डिलीट करने की कोशिश की गई। जब इस बारे में स्कूल की प्रिंसिपल से बातचीत की गई तो उन्होंने उसने इस घटना के बारे में कुछ भी कहने से साफ—साफ मना कर दिया।

सवाल यह कि पुलिस स्कूल में आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने गयी थी या उसकी मदद करने? और इस मामले में पुलिस द्वारा मामले को कवरेज कर रहे रिपोर्टर को कार्रवाई की धमकी देकर डराना कितना सही है। सवाल यह भी है कि अगर एक पत्रकार से पुलिस इस तरह पेश आती है तो आम लोगों से तो उसका रवैया और भी चौंकाने वाला होगा। कैसे यकीन किया जाए कि वो आम आदमी की मदद करेगी।

पत्रकार से की गई बदतमीजी के बारे में जब जनज्वार ने संबंधित पुलिस सब इंस्पेक्टर उत्कर्षा देशमुख को फोन किया तो पहले तो वो मामले को टालने लगीं। फिर बगलें झांकते हुए बहाना बनाने लगी कि यह मेरा पर्सनल मोबाइल नंबर है, मैं इस संबंध में सिर्फ आॅफिस के नंबर पर बात करूंगी। साथ ही यह भी कहा कि हमने रिपोर्टर के साथ कोई बदतमीजी नहीं की, न ही कैमरा छीना।

पहले भी देखा गया है कि ऐसे मामलों में हेकड़ी दिखाने वाले पुलिस अधिकारी अपनी सफाई में ऐसे ही तर्क गढ़ते नजर आते हैं। मगर बदतमीजी करते वक्त ये अपने पद का रूआब जरूर दिखाने लगते हैं।

Posted On : 31 10 2017 04:52:31 PM

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