Last Update : 22 12 2017 05:13:53 PM

लड़कियों को वेश्या बनाने वाले धार्मिक कोठों के खिलाफ खून कब खौलेगा !

वह कौन अभिभावक हैं जो अपनी बेटियों का हाथ थाम छोड़ आते हैं धार्मिक वेश्यालयों में, कौन से संस्कार हैं जो बेटी के चकलाघर की दासी बनने के बाद भी नहीं खुलती आंख, क्यों नहीं होता कभी इनके खिलाफ कोई विद्रोह, धरना और प्रदर्शन

राग दरबारी

हम आपको बाबाओं की सूची नहीं गिनवायेंगे और न ही उन लड़कियों के नाम जिनका धार्मिक वेश्यालयों में यौन शोषण हुआ है। वह सब आप जानते हैं, इस कड़ी में दिल्ली के रोहिणी इलाके में मिला यौन माफिया बाबा बस नया किस्सा भर है। बाकि सब कुछ वैसा ही है जैसा आसाराम, रामरहीम या किसी और के मामले में था।

ऐसे में हम माता—पिता अभिभावकों से पूछेंगे कि वह कौन—सी दिली ख्वाहिश होती है जिसे पूरा कराने के लिए अपनी बेटियों को बाबाओं के हाथ में सौंप आते हैं। वह शक्ति, वह आत्मबल आपमें कहां से आता है जो आपको अपनी बेटी को चकलाघर के दरवाजे पर छोड़ने का साहस, संबल और संभावनाएं देता है। वह भी धर्म के नाम पर, परमार्थ के बहाने, ईश्वर को साक्षी मानकर।

क्या आप अपनी भगवान से मांगी गयी इच्छापूर्ति के लिए बेटी को धार्मिक चकलाघर में छोड़ के आते हैं, या फिर बाबा बताता है कि आपको गड़ा धन मिलेगा या फिर आपके कष्ट दूर होंगे इसके लिए। अाखिर लालच क्या है, जो भगवान के नाम पर चल रहे वेश्यालयों में आपको बेटी के सौदागर बना देता है।

यह सौदा ही तो है? बेटी का सौदा, धर्म के बाजार में। और किसको कहते हैं सौदा? सौदा इससे अलग कहां कुछ होता है। उसमें भी फायदे की बातें होती हैं, यहां भी फायदा है? यहां भी धर्म के चकलाघर में बेटी को सौंपने के बदले कुछ सपने आपकी आंखों में यहां के दलाल आपके दिल और दिमाग में भरते हैं, अच्छे दिनों की उम्मीदें डालते हैं, बेटी चकलाघर में रहकर दासी का जीवन जिएगी तो घर की हालत, नौकरी में बरकत और समृद्धि आएगी। यही तो सौदा करते हैं सभी बाबा? फिर आप बेटी के सौदागर कैसे नहीं हुए?

सौदे से अलग कुछ होने पर तो आप माता—पिता जान ले लेते हैं। बेटियों को काट कर पेड़ों पर टांग देते हैं। उससे भी जी नहीं भरता तो उसे काटने के बाद ट्रेन की पटरी पर फेंक आते हैं, जला देते हैं या फिर नहरों में डाल आते हैं? मर्जी से कपड़ा पहनने, सिनेमा देखने, ब्यॉयफ्रेंड के साथ घूमने में आपकी इज्जत जाती है। पर बाबाओं के सामने आपकी बेटियों से सामूहिक संभोग किया जाता है, धर्म के दलाल बिना मर्जी सेक्स का करवाते हैं तो भगवान आशीर्वाद देता है, कृपा बरसती है।

पर आप सोचिए आज तक किसी बेटी ने ऐसा किया कि उसके मां—बाप जब उसे रंडी बनाने जा रहे हों तो वह विद्रोह कर दलाल बाबा का सिर कलम कर दे और उसी खूनी खंजर से अपने मां—बाप को जिबह। ऐसा कभी सुना है, नहीं न। यानी वह सदियों से आपके गुनाह माफ कर रही है और चुपचाप सह रही है। 100 महिलाओं ने कहा है कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय चलाने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित ने उनके साथ बलात्कार किया है और उन्हें इस बलात्कारी आश्रम में उनके अभिभावक, अपने और मां—बाप छोड़कर आए हैं।

जानते हैं आप ऐसा क्यों करते हैं? इसलिए क्योंकि आपके आदर्श वो हैं जो गाय रक्षा के नाम पर इंसान काटते हैं लेकिन मां, बेटी और औरत के नाम पर उनकी जीभ कट जाती है, उन्हें सांप सूंघ जाता है। ऐसा लगता है इस बीच वह सृष्टि से गायब हो जाते हैं। उनके धरना, प्रदर्शन, आगजनी सबकुछ बिल में घुस जाता है।

हिंदू कट्टरपंथियों के लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं होता। उनके लिए धार्मिक चकलाघरों में ठेली गयी हिंदू औरतों को न्याय दिलाना कोई सवाल नहीं होता, इसे वह बेमतलब का मुद्दा मानते हैं। उल्टे वह मानते और प्रचारित करते हैं कि धार्मिक चकलाघर चलाने वालों पर हमला या दंडात्मक कार्रवाई हिंदू धर्म पर हमला है।

रामरहीम और आसाराम के मामले में ऐसे तर्क दिए जा चुके हैं और उम्मीद करिए एक—दो दिन में ऐसे बयान आ जाएंगे जो बताएंगे कि धर्म के नाम पर वेश्यालय चलाने वाले हिंदू बाबा वीरेंद्र दीक्षित की गिरफ्तारी पाकिस्तानी चाल है।

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Posted On : 22 12 2017 04:30:58 PM

समाज